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Hari Shankar Tiwari: पहला इलेक्शन एक वोट से हारे थे हरिशंकर, नतीजा आते ही पूरा गोरखपुर हो गया था बंद

Hari Shankar Tiwari Death News: हरिशंकर तिवारी ने पहला चुनाव 1985 से काफी पहले लड़ा था और इस चुनाव के चलते गोरखपुर में खूब बवाल हुआ था।

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Harishankar tiwari

हरिशंकर तिवारी 6 बार चिल्लूपार से विधायक रहे।

Hari Shankar Tiwari Death News: उत्तर प्रदेश सरकार में कई बार मंत्री रहे हरिशंकर तिवारी का मंगलवार शाम निधन हो गया। गोरखपुर और पूर्वांचल की राजनीति में लंबे समय तक हरिशंकर तिवारी का एक बड़ा दखल रहा। तिवारी की पहचान बाहुबली और ब्राह्राणों के नेता की रही। हरिशंकर तिवारी ने पहला चुनाव 1985 में जीता लेकिन वो सियासत में इससे करीब डेढ़ दशक पहले आ गए थे। तिवारी ने पहला चुनाव 1972 में लड़ा था और इस चुनाव ने गोरखपुर में खूब हंगामा कराया था।


बेटे ने बताई हरिशंकर तिवारी के पहले चुनाव की कहानी
हरिशंकर तिवारी के बेटे पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने एक इंटरव्यू में पिता के राजनीतिक जीवन पर बात की थी। विनय शंकर तिवारी के मुताबिक, हरिशंकर तिवारी ने अपना पहला चुनाव 1972 में लॉकल बॉडी यानी स्थानीय निकाय का लड़ा थे। उस समय देवरिया और बस्ती की स्थानीय निकाय चुनाव की सीट होती थी। उस समय कांग्रेस की सरकार थी और देवरिया के राज मंगल पांडे स्थानीय मंत्री थे।

बकौल विनय शंकर, "कांग्रेस सरकार और प्रशासन ने मिलकर हरिशंकर तिवारी को ये चुनाव एक वोट से हरवा दिया गया। पिता जी को जीता हुआ चुनाव हरवाया गया इस पर उस समय लोगों में काफी गुस्सा और आक्रोश था। लोगों ने जमकर विरोध किया था और पूरा शहर बंद हो गया था। चुनाव बाद प्रशासन को ये दिख गया था कि लोग किसके साथ हैं।"


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