
हरिशंकर तिवारी को पूर्वांचल ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति को बदलने वाला नाम माना जाता रहा है।
पूर्वांचल की सियासत में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी को उनके चाहने वाले 'शेरे पूर्वांचल' 'ब्राह्मण शिरोमणि' कहते थे। उत्तर प्रदेश की राजनीति में दशकों तक अपनी छाप छोड़ने वाले बाहुबली नेता पंडित हरिशंकर तिवारी का मंगलवार को गोरखपुर में निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही धर्मशाला स्थित उनके आवास पर हजारों समर्थकों की भीड़ जुट गई।
पहली बार माफिया शब्द का इस्तेमाल हरिशंकर के लिए किया गया
हरिशंकर तिवारी को पूर्वांचल ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति को बदलने वाला नाम माना जाता रहा है। उत्तर प्रदेश में बाहुबली राजनीति या कहें सियासत के अपराधीकरण की शुरूआत हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही की अदावत से ही मानी जाती है। कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश में पहली बार माफिया शब्द का इस्तेमाल भी पूर्वांचल के इसी बाहुबली के लिए किया गया।
गोरखपुर का हाता हरिशंकर तिवारी के नाम से ही जाना जाता है
हरिशंकर तिवारी के निधन की खबर मिलते ही गोरखपुर में उनके समर्थकों का तांता लग गया। उनके समर्थकों ने अपने-अपने तरीके से हरिशंकर को याद कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बहराइच के ग्राम सभा सरसा के प्रधान प्रतिनिधि महेश पांडेय ने लिखा कि -दलगत राजनीति अपनी जगह है पर इनका सम्मान हमेशा रहेगा, ब्राह्मण शिरोमणि पंडित हरिशंकर तिवारी जी को महादेव, ईश्वर उन्हें श्री चरणों में स्थान दें, ॐ शांति।
बहराइच के समाजसेवी किशन तिवारी ने लिखा कि 'शेरे पूर्वांचल हमारे ब्राह्मण समाज के सिरमौर, हमारे शेर अब हमारे बीच नहीं रहे,एक युग का अंत हुआ, आपके जैसा कोई ब्राह्मण नेता न हुआ और न होगा। हमारे दिलों में आप सदैव जीवित रहेंगे, महादेव आपको अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
बहराइच के विवेक मिश्रा उर्फ विवेक बादशाहो ने व्हाट्सएप स्टेटस लगाते हुए लिखा कि- शास्त्र एवं शस्त्र के संतुलित उदाहरण यूपी बिहार के सारे बाहुबलियों के बाप, शेरे पूर्वांचल पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्राह्मण शिरोमणि पंडित हरिशंकर तिवारी जी का निधन। महादेव अपने श्री चरणों मे स्थान प्रदान करे। ॐ शांति'।
बताया जा रहा है कि हरिशंकर तिवारी पिछले काफी अरसे से बीमार चल रहे थे। हरिशंकर तिवारी का शुमार उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में किया जाता था। उनकी उम्र 86 साल की थी। गोरखपुर का हाता हरिशंकर तिवारी के नाम से ही जाना जाता है और जैसे ही उनके निधन की खबर शहर में आम हुई तो तमाम जान पहचान वाले उनके हाता में इकट्ठा होने लगे।
शेरे पूर्वांचल नहीं रहें
ब्राह्मण शिरोमणि और शेरे पूर्वांचल के रूप में लोगों ने माना अपना नेता
उनके समर्थकों का कहना था कि पंडित हरिशंकर तिवारी सिर्फ एक जाति या दल के नेता नहीं थे, पूर्वांचल की आन बान शान थे। इन्हें हम ब्राह्मण शिरोमणि और शेरे पूर्वांचल के रूप में भी जानते हैं। वह किसी एक पार्टी से बांध कर नहीं रहे, उनकी राजनिति दलगत राजनीति से ऊपर थी। हम अपने नेता और अभिभावक के अंतिम दर्शनों के लिए यहां पहुंचे हैं।
पूर्वांचल के बाहुबलि थे हरिशंकर तिवारी, पांच बार कैबिनेट मंत्री बने
पंडित हरिशंकर तिवारी की राजनीतिक शुरुआत सन 1985 से हुई, जब वह पहली बार चिल्लूपार विधानसभा से विधायक चुने गए। तीन बार कांग्रेस पार्टी से विधायक रहने के बाद उन्होंने अपनी भी एक पार्टी बनाई थी, जिसके तहत वह अकेले विधायक थे। 6 बार विधायक रहे पंडित
हरिशंकर तिवारी 5 बार कैबिनेट में मंत्री भी रहे। पंडित हरिशंकर तिवारी की पहचान शुरू से ही एक बाहुबली नेता की रही। इनका विवादों से भी चोली दामन का साथ रहा। कई बार गंभीर और आपराधिक आरोप भी लगे, जिसके तहत कई मुकदमा दर्ज हुए। एक बार हरिशंकर तिवारी ने जेल में रहते हुए भी चुनाव जीता था।
UP की राजनीति में बाहुबलियों की एंट्री कराने की शुरुआत हरिशंकर तिवारी ने ही की!
उत्तर प्रदेश की सियासत के जरिए देश की राजनीति में बाहुबलियों की एंट्री होने को बेताब थी और 1980 के दशक तक लगभग पूरा पूर्वांचल बाहुबलियों की गिरफ्त में आ चुका था। इन्हीं बाहुबलियों में से एक हरिशंकर तिवारी भी थे। वैसे तो हरिशंकर तिवारी 1972-73 में ही की राजनीति में एंट्री ले चुके थे। वह विधान परिषद का चुनाव भी लड़े, लेकिन हार गए। माना जाता है कि हरिशंकर तिवारी को खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने व्यक्तिगत रुचि लेकर हरवा दिया। रेलवे की ठेकेदारी करते हुए राजनीति में आए हरिशंकर तिवारी के साथ आगे पीछे चलने वालों की लंबी फौज थी।
हरिशंकर तिवारी और गैंगवार, हरिशंकर से टक्कर लेने की नहीं थी किसी में ताकत
80 के दशक तक गैंगवार शब्द भारत के लिए अनजाना था। मूल रूप से यह शब्द इटली में वहां की परिस्थिति के हिसाब से गढ़ा गया था। लेकिन 80 के दशक में इस शब्द का भारतीय मीडिया और राजनीति में भी खूब इस्तेमाल किया गया। माना जाता है कि इसका श्रेय भी हरिशंकर तिवारी को जाता है। इस दौर में हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही के बीच बार बार टकराव हुए, जिसे गैंगवार का नाम दिया गया। उत्तर प्रदेश में खासतौर पर लखनऊ से लेकर बलिया तक स्थिति ऐसी बन गई थी कि कब और कहां बंदूकें गरजने लगे, कहा नहीं जा सकता।
हरिशंकर तिवारी के वर्चस्व को रोकने के लिए सरकार ने बनाया था प्लान
अक्सर इस गैंगवार में हरिशंकर तिवारी के लोग भारी पड़ जाते, लेकिन वीरेंद्र शाही की गैंग भी उन्हें कड़ी टक्कर दे रही थी। इसी बीच परिस्थिति ऐसी बनी कि हेमवती नंदन बहुगुणा को पछाड़ कर ठाकुर वीर बहादुर सिंह मुख्यमंत्री बन गए। कहा तो यह भी जाता है कि राजनीति में हरिशंकर तिवारी के वर्चस्व को रोकने के लिए ही वीर बहादुर सिंह की सरकार उस समय यूपी में गैगेस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट लेकर आई थी। बावजूद इसके तिवारी 1997 से लेकर 2007 तक ना केवल लगातार चुनाव जीतते रहे, बल्कि यूपी सरकार में मंत्री भी बने रहे।
Updated on:
17 May 2023 03:26 pm
Published on:
17 May 2023 02:20 pm
बड़ी खबरें
View Allगोरखपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
