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Harishankar Tiwari Death: पूर्वांचल का वह बाहुबली नेता जिसके घर में घुसने से डरती थी पुलिस, समर्थक बम-बम शंकर जय हरिशंकर का लगाते थे नारा

Harishankar Tiwari Death: हरिशंकर तिवारी जब भी सड़कों पर निकलते या चुनाव प्रचार के लिए जाते तो उनके समर्थक बम-बम शंकर जय हरिशंकर का नारा लगाते थे।

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Harishankar Tiwari leader of Purvanchal police afraid to enter the house

5 बार के कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी

पूर्वांचल के बाहुबली नेता और 5 बार के कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी का आज 91 साल की उम्र में निधन हो गया। आज उनके निधन पर उनसे जुड़ी कहानियां एक-एक कर बाहर आ रही है। ऐसे ही एक कहानी है कि हरिशंकर तिवारी के घर में घुसने से पुलिस वाले भी डरते थे। लेकिन जब घुसे और सर्च ऑपरेशन में कुछ नहीं मिला तो अपनी लाज बचाने के लिए एक व्यक्ति को अवैध हथियार रखने के आरोप में जेल भेज दिया।

2017 से पहले तिवारी हाता में नहीं घुसी पुलिस
पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी का घर गोरखपुर शहर में तिवारी हाता के नाम से जाना जाता है। एक वक्त ऐसा भी था कि उनके खिलाफ सबूत होने के बाद भी पुलिस उनके तिवारी हाता में घुसने से डरती थी। लेकिन 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद इनके घर ‘तिवारी हाता’ पर पहली बार लूट के एक मामले में 22 अप्रैल 2017 को पुलिस का छापा पड़ा था। लेकिन छापे के बाद बैठाई गई जांच कई वर्षों से पेंडिंग है। दरअसल, मातहत पुलिस अधिकारी आरोपियों के बयान लेने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे है।

लूट के मामले में पड़ा था छापा
22 अप्रैल 2017 को गोरखपुर के एसपी सिटी हेमराज मीणा को इनपुट मिला की खोराबार के जगदीशपुर में मार्च 2017 में रिलायंस पेट्रोल पंप के कर्मचारियों से 98 लाख रुपये की लूट का आरोपी तिवारी हाता में छुपा हुआ है। एसपी सिटी ने इस मामले में बलिया के छोटू चौबे को रिमांड पर लिया था। पुलिस ने छोटू चौबे से पूछताछ की और बताया कि लूट में सोनू पाठक नाम का व्यक्ति भी शामिल है।

इसी आधार पर एसपी सिटी हेमराज मीणा की अगुवाई में पांच थानों की पुलिस ने बसपा सरकार के पूर्व मंत्री के घर छापा मारा था। करीब 30 मिनट तक छानबीन की और छह लोगों को हिरासत में लेकर निकल गए। इन सबसे थाने में पूछताछ हुई, मगर बाद में एक शख्स अशोक सिंह को ही अवैध असलहा रखने के आरोप में जेल भेजा गया।

यह भी पढ़ें: Harishankar Tiwari Death: जेल में रहते जीता पहला चुनाव, कांग्रेस से लेकर बसपा तक की सरकार में बने मंत्री

छापे के विरोध में सड़क पर उतर गए 85 साल के हरिशंकर
2017 के विधानसभा चुनाव में हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी विधायक चुने गए थे। उन्होंने जब सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस से सर्च वारंट मांगा तो पुलिस के पास कोई कागजात नहीं थे। यही वजह थी कि पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा था। पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय भी वहीं रहते थे।

इसे तिवारी परिवार ने मुद्दा बनाया। पूर्व मंत्री, पूर्व सभापति और वर्तमान विधायक के आवास पर बिना सर्च वारंट के छापे के विरोध में 24 अप्रैल 2017 को बुजुर्ग हो चुके हरिशंकर तिवारी सड़क पर निकल पड़े। उनके सड़क पर आने की भर सुनकर उनके समर्थक भी सड़क पर उतर गए। इस की खबर जैसे ही जिले के बड़े अधिकारियों को हुई उनके हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने किसी तरह उनको समझाकर शांत कराया।

बम-बम शंकर, जय हरिशंकर
शहर के पुराने लोग बताते है कि जब भी गोरखपुर में किसी को दिक्कत होती थी तो वह लोग पुलिस से पहले हरिशंकर तिवारी के घर जाते थे। वहां लोगों की समस्याओं को सुनकर उसे दूर किया जाता था। यूं समझ लीजिए की 70 से 90 के दशक में 'तिवारी हाता' ही लोगों का कोर्ट होता था। हरिशंकर तिवारी जब भी सड़कों पर निकलते या चुनाव प्रचार के लिए जाते तो उनके समर्थक बम-बम शंकर जय हरिशंकर का नारा लगाते थे।

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