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Harishankar Tiwari Death: जेल में रहते जीता पहला चुनाव, कांग्रेस से लेकर बसपा तक की सरकार में बने मंत्री

Harishankar Tiwari Death: 1985 में गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा से लगातार 6 बार विधायकी का चुनाव जीतने वाले तिवारी प्रदेश में चाहे जिस पार्टी की सरकार रही हो वह मंत्री बनते रहें।  

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पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी

गोरखपुर के बाहुबली ब्राह्मण नेता हरिशंकर तिवारी का आज लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। हरिशंकर तिवारी का पूर्वांचल खासकर गोरखपुर की कई विधानसभा सीटों पर अच्छी पकड़ मानी जाती थी। उनके बारे में कहा जाता कि माफिया से माननीय बनने वाले वह देश के पहले नेता थे। 1985 में गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा से लगातार 6 बार विधायकी का चुनाव जीतने वाले तिवारी प्रदेश में चाहे जिस पार्टी की सरकार रही हो वह मंत्री बनते रहें। कांग्रेस की सरकार से मंत्री बनने का उनका सिलसिला 2007 में बहुजन समाज पार्टी की सरकार में मंत्री बनने तक जारी रहा।

1985 में जीता था पहला चुनाव
प्रदेश में 1985 में विधानसभा का चुनाव चल रहा था। ऐसे में जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर हरिशंकर तिवारी ने भी चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने जेल में रहते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना पर्चा भरा और उस वक्त के कांग्रेस के दिग्गज नेता मार्कंडेय नंद को करीब 22 हजार के वोटों के बड़े अंतर से हराया था। एक बार चुनाव जीतने के बाद वह लगातार 22 साल तक विधायक रहे। कहा जाता है कि जेल में रहते वह चुनाव जीतने वाले देश के पहले नेता थे।

सरकार किसी की भी हो हर बार मंत्री बने तिवारी
पूर्वांचल में एक कहा जाता है कि सरकार किसी की भी हो मंत्री हरिशंकर तिवारी रहेंगे। गोरखपुर के इस ब्राह्मण नेता का राजनीतिक रसूख कुछ ऐसा कि प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, हरिशंकर तिवारी का मंत्री बनना तय था। वह कांग्रेस से लेकर 2007 की बसपा सरकार तक में मंत्री रहे।

लगातार 6 बार बने विधायक
हरिशंकर तिवारी प्रदेश के उन चुनिंदा नेताओं में से एक थे जो जब तक राजनीति में रहे लगातार चुनाव जीतते रहे। 1985 में चिल्लूपार से विधायक चुने जाने के बाद वह इस सीट से लगातार 6 बार विधायक चुने गए। 1985,1989, 1991, 1993, 1996, और 2002 में वह इस सीट से चुनाव जीते। प्रदेश में लोग इस सीट को तिवारी की सीट के नाम से जानने लगे।

पूर्वांचल की राजनीति पर दबदबा
कहा जाता है कि बाहुबली हरिशंकर तिवारी का पूर्वांचल की राजनीति पर ऐसा दबदबा था कि सभी पार्टियां उन्हें अपने साथ रखने के लिए तैयार रहती थी। गोरखपुर के साथ ही पूर्वांचल के कई सीटों पर वह विधायक और सांसद तय करते थे। जिसे चाहा विधायक बनवाया दिया, जिसे चाहा मंत्री बनवा दिया। उनके सामने दूसरे नेताओं के खड़े होने की हिम्मत नहीं होती थी।

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चुनाव हारा तो राजनीति से ले लिया संन्यास
प्रदेश में कांग्रेस से लेकर बसपा सरकार तक में मंत्री बने हरिशंकर तिवारी ने अपना आखिरी चुनाव 2012 में बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ा। लेकिन वह इस चुनाव में हार गए। चुनाव हारने के बाद उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया और अपने बेटे विनय शंकर तिवारी को अपनी राजनीतिक विरासत को सौंप दिया। 2022 के विधानसभा चुनाव में वह अपने पूरे परिवार के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। लेकिन उनके परिवार से कोई भी विधानसभा पहुंचने में नाकामयाब रहा।

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