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यूपी के पहले ‘जटायु संरक्षण केन्द्र’ में बढ़ेगा लाल सिर वाले गिद्घों का कुनबा, 15 साल में तैयार होंगे 40 जोड़े किंग वल्चर

15 साल में 40 जोड़ा रेड हेडेड वल्चर तैयार करेगा ‘जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र’ महाराजगंज के भारी वैसी गांव में बन रहा है प्रदेश का पहला ‘जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र’ लाल सिर वाले विलुप्त प्राय गिद्घों के संरक्षण का देश का इकलौता केन्द्र होगा केन्द्र में आधुनिक रिसर्च सेंटर और लैब भी बनाया जाएगा

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King Vulture

किंग वल्चर

गोरखपुर. देश में खत्म हो रहे गिद्घों को बचाने के लिये यूपी सरकार सराहनीय प्रयास के साथ महाराजगंज के फरेंदा रेंज अंतर्गत भारी वैसी गांव में यूपी का पहला विशाल ‘जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र’ बना रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इसका शिलान्यास किया है। यह देश का पहला केन्द्र है जहां रेड हेडेड वल्चर का संरक्षण और प्रजनन कराया जाएगा। इनकी संख्या बेहद कम बची हुई है और यह बेहद कम संख्या में बचे हुए हैं। केंद्र में गिद्धों के अंडों को नेचुरल तरीके से रखकर उनकी हैचिंग की जाएगी। यहां से बड़े किये गए गिद्घ जंगलों में छोड़े जाएंगे। केन्द्र में बाकायदा गिद्घों के संरक्षण और उनके विकास के संबंध में अनुसंधान होंगे, इसके लिये यहां एक प्रयोगशाला और रिसर्च सेंटर भी होगा।

  • 2012 तक प्रदेश में सिर्फ 2070 गिद्घ मिले

महाराजगंज में बनने वाले ‘जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र’ में रेड हेडेड वल्चर का संरक्षण किया जाएगा। इसका वैज्ञानिक नाम सारकोजिप्स कैलवस है और इसकी संख्या चिंताजनक रूप से कम है। इसे सबसे अधिक संरक्षण की जरूरत है। जानकारी के मुताबिक केन्द्र में पहले 10 जोड़े रेड हेडेड वल्चर यानि लाल सिर वाले गिद्घों का संरक्षण किया जाएगा। एक गिद्घ बड़ा होकर युवावस्था तक पहुंचने में 4 से पांच साल का वक्त लेता है। इस केन्द्र का लक्ष्य अगले 15 साल में 40 जोड़े ऐसे गिद्घ तैयार कर छोड़े जाने का है। पहले साल में केन्द्र में दो ब्रीडिंग एवियरी बनाने की योजना है। शुरुआती दौर में 25 प्रतिशत गिद्घ रखे जाने हैं। इनमें 70 प्रतिशत किशोरावस्था वाले और 30 प्रतिशत एडल्ट कैटेगरी के होंगे।

  • 2017 में इनकी संख्या घटकर 1350 रह गई

डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में गिद्घों का रोल काफी अहम है। गिद्घों की जनसंख्या कम होने से मृत जानवरों के शव पानी में मिलते हैं जिससे काफी बीमारियां फैलती हैं। 2006 में हरियाणा के पिंजोर में पहला गिद्घ संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्र बनाया गया। गिद्घ की नौ प्रजातियां भारत में पायी जाती हैं। इनमें पांच पंजातियां जिप्स प्रजातियां कही जाती हैं। इनके सरक्षण के लिये भारत में काम हो रहा था। पर ये पहला केन्द्र है जहां रेड हेडेड वल्चर का संरक्षण और प्रजनन होगा।

  • भारतीय वन्य जीव अधिनियम की अनुसूची एक के तहत गिद्घों को संरक्षण प्राप्त है

कब तक बनकर होगा तैयार

तीन से पांच हेक्टेयर में बनने वाले यूपी के पहले ‘जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र’ कंस्ट्रक्शन का काम अगले चार साल में पूरा किया जाएगा। केन्द्र में गिद्घों के लिये बाड़े बनाए जाएंगे। उनके बारे में अनुसंधान के लिये आधुनिक रिसर्च सेंटर और एक हाइटेक लैब बनाया जाएगा। यहां इस बात का पूरा खयाल रखा जाएगा कि गिद्घों को उनके अनुकूल वातावरण मिल सके, जिससे उनके संरक्षण का मकसद पूरा हो। केन्द्र के लिये जो जगह चयनित की गई है वहां जंगल, रोड कनेक्टिविटी और बिजली, पानी सप्लाई का पूरा खयाल रखा गया है।

महाराजगंज वन प्रभाग के मधवलिया रेंज में पिछले साल अगस्त के महीने में 100 से ज्यादा गिद्घ देखे गए थे। इसके अलावा इसी के नजदीक सरकार द्वारा निर्वासित पशुओं को रखने के लिये बनाए गए गो सदन के पास भी गिद्घों का झुंड दिखा था। गो सदन में मृत पशुओं के चलते गिद्घ देखे जाते हैं। इसके अलावा कहा जाता है कि नेपाल के बुटवल में भी गिद्घ संरक्षण केन्द्र है जहां से कुशीनगर और महाराजगंज में गिद्घ आते रहते हैं। अप्रैल के महीने में कुशीनगर के सेवरही और महाराजगंज के सोनौली में नेपाल से आए गिद्घ मिले थे, जिनमें जीपीएस ट्रैकर भी लगा था। यही वजह रही कि केन्द्र बनाने के लिये यहां के भारी वैसी गांव का चयन किय गया।


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