
स्त्री ही प्रकृति का हुआ लोकार्पण, गोरखपुर की इस महिला साहित्यकार की है कृति
डाॅ.रंजना जायसवाल के काव्य संग्रह ‘स्त्री ही प्रकृति’ का लोकार्पण किया गया।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए विनोद मल्ल ने कहा कि रंजना का रचना संसार अनूठा है, उन्होने अपने संग्रह में फलों सब्जियों आदि के नाम के शीर्षकों के अन्तर्गत स्त्रियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया है तथा स्त्रियों की स्थिति की मिसाल आम, आलू, नीम, पत्तों आदि के साथ देते हुये स्त्री और प्राकृति से समानता का एहसास कराया है ।
अध्यक्षीय वक्तव्य में वीरेन्द्र हमदम ने रंजना को एक जुझारू तथा निरन्तर अथक प्रयास करने वाली साहित्यकार बताया तथा इस बात पर प्रसन्नता जाहिर की कि गोरखपुर की महिला साहित्यकारों में रंजना जायसवाल और दरख्शां ताजवर ने हिन्दी और उर्दू साहित्य में जो स्थान हासिल किया वह उनके अथक परिश्रम का नतीजा है।
वरिष्ठ पत्रकार कामिल खां ने बताया कि रंजना की हर पुस्तक की समीक्षा लिखी है और हर पुस्तक अपने आप में एक मिसाली पुस्तक रही है।
पत्रकार डाॅ.काजी अब्दुर रहमान, डाॅ.दरख्शा ताजवर, कवि सतीश अकेला, शायर खुर्शीद आलम कुरैशी, प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष रीतेश मिश्रा, अनस आबदीन तथा अदबी लहरें के महासचिव एवं कार्यक्रम के संयोजक सैयद आसिम रऊफ, प्रमोद चोखानी, हिसामुददीन खां ने भी रंजना जायसवाल की कृतियों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरूआत युवा शायर वसीम मजहर के देशभक्ति नज्म से हुआ और कमालुद्दीन कमाल ने भी गजल पेश की।
इस अवसर पर अनिल सोनकर, गुडडू तिवारी, काजी सलीमुललाह, नासिर अमीन, विजय कुमार श्रीवास्तव, फैजुददीन, अब्दुल्ला सिराज, शारिक अहमद, इम्तियाज अब्बासी आदि मौजूद रहे।
संचालन सैयद आसिम रऊफ ने किया तथा आभार ज्ञापन एस ए रहमान ने किया।
Published on:
29 Dec 2018 01:24 pm
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