16 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

“साइबर कानून और सोशल प्लेटफॉर्म: एक युवा दृष्टिकोण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

गोरखपुर विश्वविद्यालय में गुरुवार को साइबर सुरक्षा को लेकर एक कार्यशाला हुई, जिसका मुख्य उद्वेश्य था कि किस तरह छात्र छात्राओं को इस अपराध का शिकार होने से बचाया जा सके। इस दौरान बड़ी संख्या में आए छात्रों ने विस्तृत जानकारी हासिल की।

2 min read
Google source verification
Up news, gorakhpur news

फोटो सोर्स: पत्रिका, DDU गोरखपुर यूनिवर्सिटी में कार्यशाला

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर में 44वें दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में महिला अध्ययन केंद्र एवं गृह विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान से "साइबर कानून और सोशल प्लेटफॉर्म: एक युवा दृष्टिकोण" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल दुनिया में बढ़ती चुनौतियों, साइबर अपराधों और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक करना था। यह कार्यक्रम गृह विज्ञान विभाग में सुबह 11:00 बजे से प्रारंभ हुआ।

मुख्य वक्ता रूपल ने साइबर कानून पर प्रकाश डाला

कार्यशाला की शुरुआत मुख्य वक्ता वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता रूपल त्रिपाठी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन करके किया गया, उसके पश्चात प्रो. दिव्या रानी सिंह, निदेशक, महिला अध्ययन केंद्र द्वारा उनको सम्मानित किया गया। इसके पश्चात रूपल ने अपने वक्तव्य में कहा कि साइबर कानून की बुनियादी समझ और उसके विकास पर प्रकाश डाला।

शिकायत के लिए वेबसाइट और हेल्प लाइन नंबर उपलब्ध

रूपल ने बताया कि आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और विभिन्न ऐप्स के ज़रिए व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग कर लोगों को ब्लैकमेल किया जा रहा है। ऐसे मामलों में डरने या चुप रहने के बजाय, संबंधित साइबर सेल या थाने में शिकायत दर्ज कराना आवश्यक है। सरकार द्वारा cybercrime.gov.in जैसी वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके माध्यम से पीड़ित मदद प्राप्त कर सकते हैं।

आत्म-सुरक्षा और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

यह ध्यान रखना जरूरी है कि साइबर अपराध भी मारपीट या झगड़े जैसे अन्य अपराधों के समान ही गंभीर हैं, बस इनका स्वरूप डिजिटल है। इसलिए सोशल मीडिया का प्रयोग करते समय सतर्क रहें और अपनी गोपनीयता बनाए रखें। कभी भी निजी जानकारी साझा न करें और अनजान लिंक या ऐप्स का उपयोग करने से पहले उनके रिव्यू ज़रूर पढ़ें।
साइबर अपराध से पुलिस, वकील और आईटी सेल की मदद से समाधान संभव है। अंततः आत्म-सुरक्षा और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है और साइबर सुरक्षा के प्रति शिक्षित और जागरूक बनाना हम सभी की ज़िम्मेदारी है।

डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखें

गृह विज्ञान विभाग के प्रांगण में आयोजित इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। युवाओं ने साइबर सुरक्षा, गोपनीयता, और ऑनलाइन व्यवहार से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उपस्थित विशेषज्ञ ने सरल भाषा में उत्तर दिया। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि कैसे युवा अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रख सकते हैं और किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में उचित कानूनी सहायता ले सकते हैं।

प्रो. दिव्या रानी सिंह

कार्यशाला का समापन संचालिका प्रो दिव्या रानी सिंह के धन्यवाद भाषण से हुआ। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इंटरनेट का विवेकपूर्ण उपयोग करें और एक जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनें। इस अवसर पर कुछ साइबर केस, एवं घरेलू हिंसा से जुड़े हुए केस भी प्रस्तुत की गईं, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक जीवन में ऐसे मामलों को समझने में मदद मिली। उसके साथ ही कार्यक्रम में विभाग की डॉ अनुपमा कौशिक, डॉ नीता सिंह एवं शोध छात्राएं उपस्थित रही।