
गोरखपुर। ऐतिहासिक बसंतपुर सराय में स्थित तीन सौ साल पुरानी शाही मस्जिद के सहन में हो रहे फर्श निर्माण को रोक दिया गया है। एक पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। अचानक से निर्माण रोके जाने से लोग अचंभित हैं। मस्जिद का फर्श निर्माण करा रहे पक्षकारों का कहना है कि मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड में दर्ज है। जिसका वक्फ नम्बर 1416 है व आराजी नं. 436 व 437 है। तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर मस्जिद की हद में ही सहन है। नक्शा नजरी सहित तमाम कागजात मस्जिद का रखरखाव करने वालों के पास मौजूद है। जबकि एसओ राजघाट का कहना है कि मस्जिद कमेटी को लेकर विवाद चल रहा है और दूसरा पक्ष इस निर्माण को लेकर सहमत नही है इसलिए शिकायत पर निर्माण रोका गया है।
बता दें कि मस्जिद का रखरखाव करने वाली कमेटी को वक्फ से मान्यता नही मिली है जबकि वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड कमेटी का मस्जिद में कोई दखल नही है और यह मामला वक्फ ट्रिब्यूनल में लंबित है।
इस शाही मस्जिद के रख रखाव से जुड़े अहमद हुसैन ने बताया कि मुकद्दस रमजान का महीना आने वाला है और उसमें एक खास नमाज तरावीह पढ़ी जाती है। जिसके तहत इस मस्जिद में 250-300 लोग शामिल होते है। इसी बात के मद्देनजर मस्जिद से जुड़े लोगों ने मस्जिद के कच्चे सहन को पक्का करवाने के लिए 29 अप्रैल को ईट व बालू वगैरह गिरवाया। 30 अप्रैल को फर्श निर्माण का कार्य शुरु किया। जैसी ही कार्य शुरु हुआ कुछ देर बाद एलआईयू से जुड़े लोग मस्जिद पर पहुंचे और निर्माण कार्य रोकने के लिए कहा। मस्जिद वालों ने जब वजह जाननी चाही तो एलआईयू वालों ने कहा कि यह नगर निगम की जमीन है इस पर कोई निर्माण नहीं होगा। जबकि मस्जिद वालों ने कहा कि यह वक्फ की जमीन है । कुछ देर बाद राजघाट एसओ पहुंचे और मुआयना करके शिकायतकर्ता और दूसरे पक्ष को थाने पर बुलाया और निर्माण रोकने को कहा।
शाही मस्जिद के रखरखाव से जुड़े मोहम्मद असलम व अहमद हुसैन का कहना है कि मस्जिद का फर्श न बनने देना एक साजिश है। रात होते ही मस्जिद के पीछे अराजक तत्वों का जमावड़ा लगता है। और यही आकर बाहरी लोग शराब का सेवन करते हैं।
ऐतिहासिक है बसंत सराय की यह शाही मस्जिद
बसंतपुर सराय स्थित शाही मस्जिद ऐतिहासिक है। बादशाह मुअज्जम शाह ने बसंतपुर सराय में शाही मस्जिद का निर्माण करवाया था। इस क्षेत्र के सूबेदार खलीलुर्रहमान पूरी फौज के साथ यहां रहा करते थे। नमाज की सहूलियत के मद्देनजर इसका निर्माण करवाया गया। मस्जिद ज्यादा बड़ी तो नहीं है लेकिन सूर्खी चूने से बनी मस्जिद काफी बेहतरीन है। इस मस्जिद की तामीर इतिहासकारों के मुताबिक करीब 300 साल पुरानी है। पहले सराय में मुसाफिर भी रुकते थे। यहीं पास में राप्ती नदी भी बहती थी। इसलिए इस मस्जिद का महत्व इतिहास में मिलता है। जामा मस्जिद उर्दू बाजार के साथ ही इसका निर्माण हुआ है। पुरातत्व विभाग की टीम ने दो तीन साल पहले इसका जायजा लिया था तो पाया था कि बसंतपुर सराय 400 साल पुरानी है उसी हिसाब से इस मस्जिद की उम्र 300 साल से ज्यादा है। इंटेक ने बसंतपुर सराय और मस्जिद के संरक्षण की योजना भी बनायी थी। लेकिन योजना परवान नहीं चढ़ी।
बसंतपुर सराय करीब तीन एकड़ में है और इसमें 67 कोठरियां है। यही पर बसंतपुर शाही मस्जिद है। जो मुगलिया दौर की है और यहीं पर बाबा नासिर अली शाह की मजार भी है।
Published on:
5 May 2018, 7:58 PM IST
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