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पश्चिम यूपी के बाद यहां भी दलितों पर अत्याचार, इस दिग्गज नेता के साथ एडीजी से मिल मानवाधिकारों की दी दुहाई

पुलिस के आला अधिकारियों के अलावा मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंचेे

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BSP

गोरखपुर। गगहा थाने पर हमला करने वाली भीड़ पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। बुधवार को 27 लोगों को जेल भेज दिया गया। 27 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश किया गया था। गिरफ्तार लोग दलित समाज के हैं।
उधर, बसपा ने गगहा प्रकरण में बसपा ने पुलिसिया उत्पीड़न का आरोप लगाकर एक प्रतिनिधिमंडल एडीजी से मिला और मानवाधिकारों के उल्लंधन का आरोप लगाते हुए हस्तक्षेप कर पुलिस अत्याचार रोकने की मांग की।

बसपा का प्रतिनिधिमंडल मिला एडीजी से

गगहा प्रकरण में बहुजन समाज पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को एडीजी गोरखपुर जोन दावा शेरपा से मिला। एडीजी से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस पर दलित उत्पीड़न का आरोप लगाया। बताया कि पुलिस के पास लोग लगातार शिकायत करते रहे लेकिन एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए निर्माण कराने लगी। जब लोगों ने विरोेध किया तो उन पर अत्याचार किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि प्रधान ने पुलिस के साथ मिलकर दलितों को ललकारते हुए पिटवाया। पुलिस के लोग भी प्रभाव में आकर दलितों पर गोली चलाई जिससे कई लोग घायल हो गए। गगहा थाने पर हुए विरोध के बाद पुलिस ने घरों में घुसकर महिलाओं-बुजुर्गाें तक को मारा। प्रतिनिधिमंडल ने एडीजी को बताया कि पुलिस लगातार गांव में उत्पीड़न कर रही है। दलितों के साथ जानबूझकर पुलिस का रवैया उत्पीड़नात्मक है। मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। इस प्रतिनिधिमंडल में बसपा नेता घनश्याम खरवार, पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय, सुधीर कुमार, श्रवण निराला, राजकुमार, बृजेश कुमार, घनश्याम राही, रामदेव पासवान, हरि प्रसाद, वीरेंद्र पांडेय, हरेंद्र यादव, श्रवण शर्मा, संजय पांडेय आदि शामिल रहे।

पूर्वांचल सेना ने भी जताया विरोध
पूर्वांचल सेना ने भी दलितों पर पुलिसिया अत्याचार का आरोप लगाया है। अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस ने मानवाधिकार का उल्लंघन करते हुए बेकसूर दलितों को मारापीटा। जेल ले जाने के लिए जानवरों की एक गाड़ी में ठूसकर ले गए। यह सरासर अन्याय है। बीजेपी के राज में दलितों पर अत्याचार बढ़ गया है। पुलिस भी एकपक्षीय कार्रवाई कर रही है।

यह है मामला

बता दें कि गगहा क्षेत्र के अस्थौला गांव में प्रधान द्वारा किसी का आवास ग्राम समाज की भूमि पर बनवाया जा रहा था। दलित बस्ती के लोग इस जमीन पर कब्जा के विरोध में थे। कई बार पंचायत भी हुई। सोमवार को भी प्रधान ने पंचायत कराया। लेकिन बात नहीं बनी और गांववाले इस निर्माण का विरोध कर रहे थे। कई बार थाने पर भी गांव के लोगों ने शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मंगलवार की सुबह जब निर्माण शुरू हुआ तो गांव के लोग आक्रोशित हो गए। लोग शिकायत लेकर थाने पहुंचे। बताया जा रहा कि दूसरा पक्ष प्रधान के साथ थाने पर ही था। लोगों ने शिकायत कर पुलिस को निर्माण रोकने को कहा। इसी बीच दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। लोगों के अनुसार पुलिस ने शिकायत करने आये लोगों में शामिल एक युवक को पीट दिया। यह बात गांव तक पहुंची तो काफी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए।
गांव के लोग पुलिस पर कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाकर नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने लोगों ने जब उनको हटानो का प्रयास किया तो गांव के लोग गुस्से में आ गए। बल प्रयोग किए जाने से गुस्साएं लोग ईंट-पत्थर चलाने लगे। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई। बताया जा रहा है कि गांव के लोगों ने एसओ की प्राइवेट गाड़ी व कुछ बाइक्स को क्षति पहुंचाई।
स्थितियां बेकाबू होने लगी। पुलिस ने रबर के बुलेट दागने शुरू किये। गांव के लोग गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग को जाम कर दिया। पुलिस ने लोगों को यहाँ से भी तितर-बितर बल प्रयोग कर किया। फायरिंग से भगदड़ मच गई। इस फायरिंग में तीन गांववाले घायल हो गए। घटना की सूचना पाकर मौके पर आला अधिकारी भी पहुंच गए थे।
इस प्रकरण के बाद करीब 250 से अधिक लोगों पर केस दर्ज किया गया था। दो दिनों में करीब 27 गिरफ्तारियां भी की गई थी। गिरफ्तारी के बाद बुधवार को सभी 27 लोगों को कोर्ट में पेश किया गया। पेशी के बाद सबको जेल भेज दिया गया।

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