
सोमवार को नई दिल्ली स्थित साहित्य अकादमी रवींद्र भवन के सभागार में पूर्व अध्यक्ष साहित्य अकादमी प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने गोरखपुर के ही मूल निवासी प्रो. रामदरश मिश्र को अपने हाथों से सरस्वती सम्मान प्रदान किया। इस सम्मान से गोरखपुरवासियों में उत्साह व उमंग है। सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष, साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं दस्तावेज पत्रिका के संपादक प्रो. विश्वनाथ तिवारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान बिड़ला फाउंडेशन के डायरेक्टर सुरेश रितुपर्ण तथा युवा आलोचक ओम निश्चल भी उपस्थित थे। युवा आलोचक ओम निश्चल ने प्रो. रामदरश मिश्र की रचानाओं पर अपनी आलोचना रखी।
इस बार सरस्तवी सम्मान समारोह का आयोजन काफी आकर्षक रहा। प्राय: सरस्वती सम्मान राजनीति से जुड़े व्यक्तियों के हाथों से दिलवाया जाता रहा है। इस बार यह पुरस्कार साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी के हाथों दिलवाया गया। यह सुखद संयोग ही रहा है कि प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी और प्रो. रामदरश मिश्र दोनों गोरखपुर के हैं। प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि यह सम्मान मूलत: गोरखपुर में जन्मे प्रो. रामदरश मिश्र को दिया गया है। यह गोरखपुर के निवासियों के लिए खुशी की बात है। प्रो. रामदरश मिश्र की अधिकतर रचनाएं गोरखपुर के परिवेश पर ही केंद्रित हैं। वह गोरखपुर के बाहर चाहे जहां भी रहे यह परिवेश उनकी रचनाओं में जीवित एवं सुरक्षित है।
लेखक एवं रचनाकार रामदरश मिश्र की जीवन यात्रा गोरखपुर जिले के डुमरी गांव (14 अगस्त 1924) से शुरू हुई। उनकी कविता यात्रा की शुरुआत 'पथ के गीत' संग्रह से हुई। इस तरह गांव-जवार के अनुभवों के ताने बाने से समृद्ध होते हुए रामदरश मिश्र पढ़ने के लिए बनारस पहुंचे जहां एक तरफ गीतों की आबोहवा थी तो दूसरी तरफ नई कविता की बयार बह रही थी। उन्होंने दोनों विधाओं में सृजन किया।
Published on:
28 Jun 2022 09:32 am
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