
CM yogi
2007 के गोरखपुर दंगे की आंच एकबार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण में यूपी सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है कि योगी आदित्यनाथ पर 2007 में भड़काऊ भाषण देने के मामले में क्यों मुकदमा न चले।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की बेंच ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने परवेज परवाज व असद हयात की स्पेशल रिट की सुनवाई के दौरान यह नोटिस जारी किया है। यह रिट इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश 22 फरवरी 2018 के विरूद्ध दाखिल की गई थी।
याचिकादाताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट इंदिरा जय सिंह व फेजुल अहमद अयूबी ने पक्ष रखा है।
बीते 22 फरवरी को हाईकोर्ट इलाहाबाद ने गोरखपुर दंगे के लिए एक भड़काऊ भाषण देने के आरोपी बनाए गए योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुकदमा चलाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने सबूत को नाकाफी मानते हुए यह फैसला लिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
यह है पूरा मामला
27 जनवरी 2007 को गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ था। आरोप है कि इस दंगे में दो लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।
इस मामले में दर्ज एफआईआर में आरोप है कि तत्कालीन भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ, गोरखपुर के विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल और गोरखपुर की तत्कालीन मेयर अंजू चौधरी ने रेलवे स्टेशन के पास भड़काऊ भाषण दिया था और उसी के बाद दंगा भड़का था। इस मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के कई नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। इन लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए गोरखपुर के तुर्कमानपुर निवासी परवेज परवाज और सामाजिक कार्यकर्ता असद हयात ने याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री योगी पर केस चलाने की याचिका खारिज की
गोरखपुर में साल 2007 में हुए साम्प्रदायिक दंगे के मामले में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस चलाने संबंधी याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। इस याचिका में गोरखपुर दंगों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका की फिर से जांच कराए जाने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने इस मामले में पिछले साल 18 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। करीब 11 साल पहले गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इस मामले में राज्य सरकार ने पहले आदित्यनाथ योगी को अभियुक्त बनाने से ये कहकर मना कर दिया था कि उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं हैं। बाद में मामले की सीआईडी क्राइम ब्रांच से जांच हुई और फिर सरकार की ओर से हाईकोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई। लेकिन याचिका कर्ताओं का आरोप है कि बिना किसी जांच और कार्रवाई के ही सरकार ने क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार की और उस पर सुनवाई की। फिर 22 फरवरी 2018 को अपना फैसला सुना दिया।
Published on:
20 Aug 2018 04:19 pm
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