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मानदेय के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान की होगी जांच, पांच साल के भुगतान की आॅडिट का निर्णय

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि में अपनी ही प्रवेश परीक्षा में मानदेय लेने का मामला
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गोरखपुर

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Dheerendra Vikramadittya

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Updated: 20 Jul 2018, 2:04 PM IST

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डीडीयू

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पिछले पांच सालों में भुगतान किए गए विभिन्न मदों के मानदेय की जांच कराई जाएगी। जांच की आंच में कई लोगों के फंसने का अंदेशा जताया जा रहा है। विवि में बीते दिनों में अपनी ही प्रवेश परीक्षा और काउंसलिंग में जिम्मेदारों को मोटी रकम मानदेय के रूप में भुगतान का मामला सामने आने के बाद विवि में यह मामला तूल पकड़ रहा।

अपनी ही प्रवेश परीक्षा में मानदेय लेने के मामले के बाद निर्णय

मामला यह है कि गोविवि ने इस बार पहली बार अपने संबद्ध काॅलेजों और विवि में स्नातक प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया। परीक्षा आयोजन में सहयोग करने वालों के मानदेय निर्धारण में विवि द्वारा सभी नियम कानून को ताक पर रख दिया गया। आलम यह है कि विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त अधिकारी को अपनी ही प्रवेश परीक्षा में मानदेय भुगतान का प्राविधान कर दिया गया। वित्त समिति और कार्यपरिषद से इसके लिए बजट भी पास कर दिया गया था। संस्तुति के मुताबिक कुलपति को 1,96,000 रुपये मानदेय तो कुलसचिव, वित्त अधिकारी और परीक्षा नियंत्रक को 45-45 हजार रुपये प्रवेश कार्य में सहयोग करने के लिए मानदेय तय कर दिया गया। पैसों की बंदरबांट यहीं नहीं थमी रही। काउंसिलिंग के दौरान अधिष्ठातागण भी 5,000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान तय किया गया साथ ही इनके लिए 25000 रुपये एकमुश्त देने का प्राविधान किया गया। इसके अलावा प्राक्टर को बीस हजार रुपये भुगतान होना था।
यह मामला प्रकाश में आने के बाद तूल पकड़ा। इसके बाद कुलपति, वित्त अधिकारी और प्रॉक्टर तो पहले ही मानदेय को लेने से इनकार कर दिया लेकिन अन्य लोगों ने चुप्पी साध ली।

अब पांच सालों के मानदेय भुगतान की जांच की आंच

विवि में पिछले पांच सालों में मानदेय के नाम पर खर्च किए गए बजट की आॅडिट करायी जाएगी। मानदेय भुगतान को लेकर शासन की गाइड लाइन है। जांच के दौरान यह परखा जाएगा कि मानदेय मद में जो भुगतान किया गया है वह क्या शासन की गाइडलाइन के अनुसार है। दरअसल, डीडीयू में कुछ सालों से बेतरतीब मानदेय भुगतान की बात सामने आती रही है। डीडीयू पिछले पांच सालों में कई बड़ी परीक्षाएं करा चुका है। 2013 में गोरखपुर विवि ने राज्यस्तरीय बीएड प्रवेश परीक्षा कराई थी। इसके बाद विवि द्वारा सीपीएमटी की परीक्षा का आयोजन कराया गया। इन सबके अलावा कई और प्रवेश परीक्षाओं में मानदेय के नाम पर लाखों का भुगतान हुआ है। सूत्रों की अगर मानें तो इस जांच के आदेश के बाद विवि में खलबली मची हुई है।