
पोक्का बोइंग रोग की चपेट में गन्ना, परेशान हैं किसान
गोरखपुर. प्रदेश के गन्ना किसान इस समय परेशान हैं। टिड्डियों के हमले का बाद अब गन्ना फसल पोक्का बोइंग' रोग की चपेट में है। पूर्वांचल के गोरखपुर और बस्ती मंडलों के लगभग सभी जिलों में इसका प्रकोप देखा जा रहा है। देवरिया और महराजगंज के किसान इससे ज्यादा परेशान हैं। गन्ना विकास विभाग और चीनी मिलें इसका सर्वे करवा रहीं हैं और प्रभावित क्षेत्रफल का आंकलन करने जुटीं हैं। कुशीनगर के सेवरही स्थित गन्ना शोध केंद्र की टीम का अलावा गन्ना विकास विभाग और गन्ना विभाग की टीमें बीमारी के फैलाव का आंकलन करने में जुटीं हैं। यहां के किसानों ने लगभग 02 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना बुवाई की है।
एक अनुमान के मुताबिक बीमारी ने गन्ने की 80 फीसदी फसल को अपने आगोश में ले लिया है। कृषि वैज्ञानिक डा. आदित्य द्विवेदी के मुताबिक पोक्का बोइंग रोग एक फफूंदी जनित रोग है। इसका प्रकोप वर्षा ऋतु में सर्वाधिक होता है। रोग की प्रारंभिक अवस्था में अगौले की पत्तियों पर नीचे की ओर जहां पत्ती तने से जुड़ती है, वहां सफेद पीले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। बाद में यह लाल भूरे रंग के हो जाते हैं। इस रोग चपेट में आकर पत्ती वहां से सड़कर और टूटकर गिर जाती है। रोग की अधिकता होने पर अगौले की सारी पत्तियां आपस में मुड़कर एक दूसरे से उलझ जाती हैं और सड़कर गिरने लगती हैं। अगौला एक ठूंठ की तरह दिखाई देता है। इससे फसल की बढ़वार रुक जाती है और उपज में भारी कमी दिखाई देती है।
गन्ना विकास एवं किसान प्रशिक्षण संस्थान गोरखपुर के सहायक निदेशक डॉ ओमप्रकाश गुप्ता के अनुसार रोग के लक्षण दिखाई देने पर कापर आक्सीक्लोराइड 0.2 फीसदी का घोल यानी 500 ग्राम दवा को 200 ली. पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर में 15 दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव करने से यह नियंत्रित होता है। इसके अलावा बावस्टीन का छिड़काव करने से भी फसल को नियंत्रण में किया जा सकता है।
Published on:
11 Jul 2020 02:44 pm
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