15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बीआरडी प्रकरण: आठवां आरोपी उदय प्रताप शर्मा रेलवे स्टेशन से हुआ गिरफ्तार

अब केवल एक आरोपी पुष्पा सेल्स का मालिक मनीष भंडारी है पकड़ से दूर

4 min read
Google source verification
brd tragedt

गोरखपुर हादसा

गोरखपुर. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूमों की ऑक्सीजन से हुई मौत के मामले में आठवीं गिरफ़्तारी गुरुवार को की गई। गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर ऑक्सीजन कांड का आरोपी लिपिक उदय प्रताप शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया। एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बताया कि गुरुवार को रेलवे स्टेशन से आरोपी उदय प्रताप शर्मा की गिरफ्तारी हुई है। वह 5 मई को उस पटल पर तैनात किया गया था जहाँ ऑक्सीजन खरीद-फरोख्त के फंड आदि की जाती थी।


बुधवार को सीजेएम कोर्ट में इस प्रकरण के आरोपी चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल ने भी सरेंडर कर दिया था। बुधवार को कैंट पुलिस में मंगलवार को गिरफ्तार हुए एक अन्य आरोपी संजय त्रिपाठी को भी कोर्ट में पेश किया। दोनों को न्यायाधीश ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब पुलिस की गिरफ्त से एक आरोपी बाहर हैं। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी के लिए अब पुलिस अपना पसीना बहा रही।

बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की कमी के चलते चार दर्जन से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी। मामला काफी उछलने के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच समिति का गठन किया गया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद मेडिकल के पूर्व प्राचार्य डॉ.राजीव मिश्र व उनकी पत्नी समेत नौ जिम्मेदारों को आरोपी बनाया गया था। इसके बाद डीजीएमई डॉ.केके गुप्ता की तहरीर पर हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज हुआ। बाद में यह मामला गोरखपुर के गुलरिहा थाने में स्थानांतरित हो गया।

केस दर्ज होने के बाद सभी आरोपी फरार हो गए। इनको पकड़ने के लिए स्थानीय पुलिस के अलावा एसटीएफ लगाई गई। एसटीएफ ने सबसे पहली गिरफ़्तारी पूर्व प्राचार्य डॉ.राजीव मिश्र व उनकी पत्नी डॉ.पूर्णिमा शुक्ला की कानपुर में की। इसके बाद सहजनवा में एसटीएफ ने डॉ.कफील खान को गिरफ्तार किया। तो स्थानीय पुलिस ने सुधीर पांडेय को गोरखपुर में ही गिरफ्तार किया। एक दिन पहले डॉ.सतीश कुमार ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। मंगलवार को छठवां आरोपी संजय त्रिपाठी कैंट पुलिस के हत्थे चढ़ गया। बुधवार को एक अन्य आरोपी गजानन जायसवाल ने आत्मसमर्पण कर लिया जबकि गुरुवार को आठवां आरोपी उदय शर्मा गिरफ्तार कर लिया गया।


ये अभी भी हैं फरार

पुष्पा सेल्स के मनीष भंडारी


इस पर पुष्पा सेल्स में ऑक्सीजन की सप्लाई ठप करने का आरोप है। ऑक्सीजन जीवनरक्षक है। इसकी आपूर्ति बंद करना गुनाह है। इसके लिए आपूर्तिकर्ता मनीष भंडारी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। लेकिन यह अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा सका है। इसकी खोज में अब भी लगातार छापेमारी जारी है।


इनकी हो चुकी है गिरफ़्तारी, जा चुके हैं जेल

आरोपी 5: निलंबित प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा

यह है आरोप: रपट के अनुसार बीआरडी मेडिकल कॉलेज के निलंबित प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा का अपने ही स्टाफ व सहयोगी डॉक्टर्स पर कोई प्रभाव नहीं। इनके आदेशों की अनदेखी तक करते रहे। प्राचार्य को सब पता होने के बाद भी ऑक्सीजन सप्लाई सुचारू रहे इसके लिए कोई पहल नहीं की गई। यहां तक कि आपूर्ति बंद होने की चेतावनी सम्बंधित सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी। हद तो यह कि मेडिकल कॉलेज में इतने बड़े संकट की आशंका को जानने के बाद भी 9 अप्रैल को मुख्यमंत्रयोगी आदित्यनाथ के दौरे के तत्काल बाद छुट्टी पर चले गए। उनपर खुद मुख्यमंत्री भी आरोप लगा चुके हैं कि वह दो दिन पहले चार घंटे तक मेडिकल कॉलेज में रहे लेकिन एक बार भी इस संभावित संकट पर चर्चा नहीं की। इसलिए इनपर केस दर्ज हुआ। एसटीएफ में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

आरोपी 8: डॉ.पूर्णिमा शुक्ला

निलंबित प्राचार्य की पत्नी हैं। गोला में तैनाती के बाद खुद को मेडिकल कॉलेज में संबद्ध कराया गया। फ़ोन पर कर्मचारियों से कमीशन की मांग की जाती थी। आरोप है कि पेमेंट में लेटलतीफी में इनका भी योगदान था। ये मेडिकल कॉलेज में हर मामले में अवैध हस्तक्षेप करती थीं। ऑक्सीजन मामले में आरोपी बनाकर एफआईआर दर्ज कराया गया है। एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी 7: डॉ.कफील खान

यह 100 नम्बर के प्रभारी थे। ऑक्सीजन ख़त्म होने की बात अधिकारियों तक समय से नहीं पहुंचाई। इसके अलावा इनपर प्राइवेट प्रैक्टिस का भी आरोप है। इसलिए ये भी इस मामले में आरोपी हैं और इनके खिलाफ भी केस दर्ज है। एसटीएफ ने किया था गिरफ्तार।

आरोपी 4: सुधीर पांडेय

लेखा विभाग का लिपिक सुधीर पांडेय भी ऑक्सीजन कांड का आरोपी है। घूस के लिए फाइल देर से प्रस्तुत करने का आरोप है।


आरोपी 3: संजय त्रिपाठी
मेडिकल कॉलेज के लेखा विभाग का लिपिक संजय त्रिपाठी भी इस प्रकरण में आरोपी था। फरार चल रहे त्रिपाठी को मंगलवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आज उसकी पेशी हुई और न्यायालय ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

लिपिक उदय प्रताप शर्मा की आज हुई गिरफ़्तारी
अब लिपिकों में केवल उदय प्रताप शर्मा ही पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इसके अलावा पुष्पसेल के मनीष भंडारी और चीफ फार्मेसिस्ट गजानन जायसवाल भी आरोपियों में शामिल हैं। गुरुवार को पुलिस ने जायसवाल को रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया।

इन्होंने किया सरेंडर

आरोपी 6: स्टॉक प्रभारी व एनेस्थीसिया के हेड डॉ.सतीश कुमार। सोमवार को डॉ.सतीश ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इनको भी न्यायालय ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
यह है आरोप: रपट के अनुसार ऑक्सीजन की सप्लाई की सुनिश्चितता डॉ.सतीश कुमार पर ही थी। डॉ.सतीश ऑक्सीजन की उपलब्धता सम्बंधित व स्टॉक आदि के प्रभारी थे। लेकिन इन्होंने कभी भी स्टॉक रजिस्टर या लॉग बुक चेक करने की जहमत तक नहीं उठाई। कर्मचारियों के भरोसे सब रहा। हद तो यह कि जब ऑक्सीजन के लिए अफरातफरी मची थी, पूरे देश की निगाहें मेडिकल कॉलेज में थी तो वह बिना किसी आधिकारिक सूचना के मुंबई 11 अगस्त को चले गए। 100 बेड वाले एईएस वार्ड में एसी ख़राब होने की लिखित शिकायत के बाद भी इन्होंने कोई सक्रियता नहीं दिखाई। ऐसा आरोप रिपोर्ट में है। बताया जा रहा एसी ख़राब होने पर मासूम बच्चों के गर्मी से बेहाल होने का जिक्र लिखित रूप से हटाए गए प्रभारी डॉ.कफील ने दी थी। इसलिए इनपर केस हुआ। अभी फरार चल रहे।

आरोपी 9: मेडिकल कॉलेज में तैनात चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल
ये है आरोप: डॉ.सतीश कुमार के साथ आक्सीजन की उपलब्धता, लॉग बुक और स्टाक बुक का जिम्मा गजानन जायसवाल पर ही था। लॉग बुक व स्टॉक बुक में अनियमित इंट्री है। कई जगह आंकड़ों में बाजीगरी दिखाने के लिए ओवरराइटिंग भी हुई है। ये भी फरार थे। आज बुधवार को आत्मसमर्पण किया है कोर्ट में।

input- धीरेंद्र गोपाल