
आप भी इन महिलाआें की तरह अपनी आजीविका के लिए आत्मनिर्भर हो सकती
गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा राखुखोेर गांव को गोद लेकर किसानों को वैज्ञानिक खेती में मदद के साथ साथ महिलाओं का समूह बनवाकर उनको स्वावलंबी बनाया जा रहा है। गांव के विकास में ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित कराने के साथ सहभागी विकास का एक खाका भी तैयार किया जा रहा।
केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ.राहुल कुमार सिंह, गृह वैज्ञानिक डॉ. प्रतीक्षा सिंह तथा वैज्ञानिक पशुपालन विवेक प्रताप सिंह ने गांव के रामनिवास मौर्य, महेश कुमार, रामनरेश सिंह, महंत तिवारी, प्रेमशीला तथा चंद्रकला देवी सहित गांव के जागरूक किसानों की बैठक की। किसानों को इन लोगों ने वैज्ञानिक व आधुनिक विधि से खेती-किसानी की तरकीब बताई। वैज्ञानिकों ने समझाया कि मिट्टी जांच की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है ऐसे में किसान अब पुराने तरीके से उर्वरक का छिड़काव करना छोड़ आवश्यकतानुसार उर्वरक ही खेतों में दें। इन लोगों ने नीलगाय तथा आवारा छुट्टा पशुओं की वजह से सब्जी की फसल में होने वाले नुकसान, खरपतवार तथा कीट नियंत्रण की समस्या को प्रमुखता से बताते हुए विस्तार से चर्चा किया।
विकास के लिए रोडमैप बनाएंगे वैज्ञानिक
जागरूक किसानों की सहायता से गांव का सामाजिक मानचित्र भी तैयार किया गया। इसके साथ ही साथ वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ गांव के चारों छोरों का भ्रमण किया। वैज्ञानिकों द्वारा ग्रामीण सहभागी मूल्यांकन किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा अनुमोदित ग्रामीण सहभागी मूल्यांकन (पी.आर. ए.) द्वारा गांव के सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक पहलुओं का वैज्ञानिकों द्वारा विश्लेषण किया जाता है। फिर आवश्यकता एवं समस्या के अनुरूप योजना की रूपरेखा तैयार कर गांव के कृषिगत विकास के लिए रोजगार परक प्रशिक्षण, उत्तम कोटि के बीज, तथा सलाहकारी सेवाएं प्रदान की जाएगी।
महिलाओं को स्वावलंबी भी बना रहे केंद्र के लोग
महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा चयनित गांवों मं समूह बनाकर महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा रहा। जंगल कौड़िया विकासखंड के चैक माफी गांव में 36 महिलाओं के दो समूह को अगरबत्ती बनाने की विधि पर एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।
केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ. प्रतीक्षा सिंह ने बताया कि महिलाओं के समूह को प्रशिक्षित कराने का मुख्य उद्देश्य उनमें जागरूकता तथा कौशल विकास के द्वारा आय तथा रोजगार सृजन कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। महिलाओं के इस समूह का गठन 8 महीने पूर्व किया गया था तथा समय-समय पर उनको सलाहकारी सेवाएं, मासिक बैठक के द्वारा वैज्ञानिकों द्वारा समय- समय पर प्रेरित किया जाता रहा है । प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रसार वैज्ञानिक डॉ. राहुल कुमार सिंह ने तैयार हुए उत्पाद को बाजार की प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने पर विस्तार बताया। इन महिलाओं को उद्यान वैज्ञानिक डाॅ. अजीत श्रीवास्तव अब खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण देंगे।
Published on:
19 May 2018 04:50 am
