
गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 92वें संस्थापक सप्ताह के समापन समारोह में मंगलवार को सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ मुख्य अतिथि नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी मौजूद थे।
अपने उद्बोधन में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि आज के लिए योगी आदित्यनाथ का आमंत्रण मिला था, और इसी के साथ आज नोबल पुरस्कार प्राप्त होने की दसवीं वर्षगांठ पर उन्हें दिल्ली के एक कार्यक्रम में शामिल होना था, पर यह संयोग ही रहा की दिल्ली का कार्यक्रम रद्द हो गया, और वह गोरखपुर की इस पुण्यभूमि का दर्शन करने आ गए।
सीएम योगी आदित्यनाथ से अपने 25 वर्ष पहले के संस्मरण को सुनाते हुए सत्यार्थी कुछ भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि करीब 25 वर्ष पूर्व गोरखनाथ के आसपास नेपाल के बच्चों से दुकानों पर काम कराने की जानकारी होने पर वह दिल्ली में युवा सांसद योगी आदित्यनाथ से मिलने उनके दिल्ली के फ्लैट पर गए थे।
योगी आदित्यनाथ के फ्लैट पर साधारण तख्त और कुर्सियां थीं। चुम्बकीय आकर्षण वाली मुस्कुराहट के साथ योगी जी को जैसे ही उन्होंने बाल श्रम के बारे में बताया उन्होंने फौरन फोन मिलाकर इस समस्या को समाप्त करने का आदेश दिया। कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि पहली बार किसी राजनेता का यह रूप देखकर कौन दीवाना नहीं हो जाएगा।
सीएम योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि कोरोना संकट के दौर में सीएम योगी ने नैतिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी लेकर उन प्रवासियों के भी भोजन का प्रबंध किया जो उत्तर प्रदेश होकर अपने राज्यों को गए। ऐसे ही बिहार के एक व्यक्ति ने योगी के बिहार दौरे पर उनसे मिलकर, एक लिफाफा देकर उनके प्रति आभार जताया कि जब वह अपने घर आ रहा था तो उसके भोजन का इंतजाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।
इस अवसर पर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि इस सभा मंडप को देखकर लग रहा है कि जैसे यहा बैठे युवाओं, युवतियों में राष्ट्र निर्माण के लिए कुछ कर दिखाने का जज्बा है। उन्होंने कहा कि 1932 में महंत दिग्विजयनाथ ने राष्ट्र के प्रति आगे बढ़ने की जो इच्छा जगाई और महंत अवेद्यनाथ ने उसे और आगे बढ़ाया, योगी आदित्यनाथ ने और आगे बढ़कर इस भूमि को महान पुण्यभूमि में बदल दिया है।
Published on:
10 Dec 2024 06:53 pm
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