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अफ्रीकी और अमेरिकी-देशों की यात्रा के लिए जरूरी खबर, AIIMS गोरखपुर में शुरू होगा यह वैक्सीनेशन सेंटर

AIIMS के CEO प्रोफेसर जीके पॉल ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत रखने के लिए नई तकनीकों और वैक्सीन को जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि यलो फीवर वैक्सीनेशन सेंटर की तैयारियों की समीक्षा के लिए आई मंत्रालय की टीम ने इसके स्थापना की मंजूरी दे दी है।

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अफ्रीकी और अमेरिकी-देशों की यात्रा के लिए जरूरी खबर, AIIMS गोरखपुर में शुरू होगा यह वैक्सीनेशन सेंटर

अफ्रीकी और अमेरिकी-देशों की यात्रा के लिए जरूरी खबर, AIIMS गोरखपुर में शुरू होगा यह वैक्सीनेशन सेंटर

AIIMS गोरखपुर में जल्द ही यलो फीवर वैक्सीनेशन सेंटर शुरू किया जाएगा। अफ्रीका और अमेरिका जैसे देशों की यात्रा करने के लिए यह आवश्यक होता है। अभी तक यह सुविधा केवल KGMU लखनऊ में उपलब्ध है। AIIMS में पूर्वांचल का पहला वैक्सीनेशन सेंटर बनाया जाएगा।इसे शुरू करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम ने हरी झंडी दे दी है।

AIIMS के CEO प्रोफेसर जीके पॉल ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत रखने के लिए नई तकनीकों और वैक्सीन को जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि यलो फीवर वैक्सीनेशन सेंटर की तैयारियों की समीक्षा के लिए आई मंत्रालय की टीम ने इसके स्थापना की मंजूरी दे दी है।

प्रशिक्षण के लिए डॉक्टर्स को बुलाया गया

मंत्रालय की ओर से इसका प्रशिक्षण देने के लिए AIIMS के डॉक्टर्स को बुलाया गया है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वैक्सीन की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। इसके बाद यलो फीवर वैक्सीनेशन सेंटर सुचारु रूप से चलने लगेगा। प्रदेश में अभी तक यह व्यवस्था केवल किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ में थी। AIIMS में वैक्सीनशन सेंटर बन जाने से इसका लाभ पूर्वी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में रहने वाले लोगों को मिलेगा। AIIMS के आयुष ब्लॉक में सेंटर स्थापित किया जाएगा।

जानिए येलो फीवर नाम क्यों पड़ा

सामुदायिक और पारिवारिक चिकित्सा विभाग के HOD डॉ. हरि शंकर जोशी ने बताया कि इस बीमारी के केस अभी भारत में नहीं हैं। लेकिन यहां इसके लिए परिस्थिति और वातावरण दोनों अनुकूल हैं। इसलिए यह वैक्सीन उन इंटरनेशनल यात्रियों को लगाई जाती है, जो अफ्रीका महाद्वीप, सेंट्रल और साउथ अमेरिका के 42 देशों में यात्रा करते हैं।

डॉ. आनंद मोहन दीक्षित ने बताया यह रोग एडीज एजिप्टि मच्छरों के काटने से फैलता है। इस बीमारी में पीलिया की वजह से मरीज की त्वचा और आंखें पीली हो जाती हैं। इसीलिए, इस बीमारी का नाम येलो फीवर पड़ा।


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