
मुख्यमंत्री के शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए युवाओं की टोली ने संभाली कमान
जाम के झाम में फंसे गोरखपुर के लिए युवाओं की टोली आशा की किरण बनकर आई हैं। शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को सही करने के लिए 25 युवाओं ने हर दिन छह घंटे खर्च करने की ठानी है। यातायात पुलिस भी इन युवाओं के पुनीत काम में खुलकर मदद कर रही।
मुख्यमंत्री के शहर में जाम एक बड़ी समस्या है। इस समस्या से निजात पाने के लिए दर्जन भर से अधिक पुलिस अधिकारी पिछले कुछ सालों में प्रयास कर चुके हैं लेकिन यातायात सुव्यवस्थित नहीं हो सका। इसमें सबसे अधिक दिक्कत यातायात पुलिस की कमी भी है। जाम से जूझते अपने शहर को निजात दिलाने के लिए कुछ युवा सामने आए हैं। एनसीसी का प्रशिक्षण प्राप्त इन युवाओं ने करीब दो माह पहले एक गु्रप बनाकर यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पुलिस की सहायता के लिए आगे आने की ठानी। फिर इन युवकों ने ट्रैफिक असिडेंसी
यूनिट की नींव रखी।
इस टीम की अगुवाई कर रहे एनसीसी प्रशिक्षण प्राप्त आदित्य कुमार मिश्र व उदय प्रताप मिश्र बताते हैं कि वे लोग यातायात व्यवस्था में मदद करने के लिए एसपी यातायात से मुलाकात किए। उनसे प्रोत्साहन मिलने के बाद 25 युवाओं के दल को दो महीना तक प्रशिक्षित किया गया। मंगलवार से फिर हम सब शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू करने के लिए विभिन्न चैराहों पर लग गए।
आदित्य व उदय बताते हैं कि शुरुआती खर्चाें के लिए उन लोगों ने आपस में मिलकर रुपये एकत्र किए। वह बताते हैं कि महीना में करीब 86 हजार रुपये खर्च होना है। पहले दो महीना तक तो सभी लोग आपस में मिलकर धनखर्च करेंगे
इसके बाद वे लोग सीएसआर से धन प्राप्त करने की कोशिश करेंगे। अगर सीएसआर (कारपोरेट सोशल रिस्सपांसिबिलिटी) से मदद मिल गई तो टीम के सदस्यों को कुछ मानदेय भी दे सकेंगे।
फिलहाल, ये युवा शहर को जाम के झाम से निजात दिलाने में जुटे हैं। अगर इनका प्रयास सफल रहा तो संभव है मुख्यमंत्री के शहर का यह प्रयोग अन्य बड़े शहरों में भी जाम से निजात दिलाने में मददगार साबित हो।
Published on:
13 Nov 2018 11:33 pm
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