
ग्रेटर नोएडा. सूरजपुर में आयोजित हुए बराही मेले का सोमवार को समापन हो गया। भारतीय संस्कृति को संजोए बाराही मेले में कई ऐतिहासिक चीजें जुड़ी हुई है। बाराही देवी मंदिर , शिव मंदिर के अलावा यहां चमात्कारिक सरोवर भी है। इसमें नहाने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। मान्यता के अनुसार हजारों वर्ष पहले इस स्थान पर पुल्सत्य ऋषि ने सरोवर का निर्माण किया था। साथ ही सैकड़ों वर्षों तक भगवान शिव की अराधना की थी। मान्यता है कि यहां पुल्सत्य ऋषि को भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। जिसकी वजह से यह स्थान शुद्ध हो गया। यहां विदेशी लोग भी शिव मंदिर के दर्शन करने आते है।
मान्यता के अनुसार रावण के दादा पुल्सत्य ऋषि ने सूरजपुर में शिव मंदिर की स्थापना की थी। शिवलिंग की स्थापना करने के बाद में उन्होंने पूजा की थी। मंदिर के पास में ही एक सरोवर था। बताया जाता है कि इस सरोवर का निर्माण पुल्सत्य ऋषि ने किया था। पुल्सत्य ऋषि के विश्रवा पुत्र हुए थे। विश्रवा ऋषि भी शिवभक्त थे। बिसरख को रावण की जन्मस्थली माना जाता है। बिसरख में रावण ने भी शिवलिंग की स्थापना की थी। बिसरख में शिवलिंग पूरे वैभव के साथ में विराजमान है। यहां दूर-दूर से आज भी पूजा करने के लिए लोग आते है।
सूरजपुर शिव मंदिर सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने बताया कि सरोवर में नहाने से सभी चर्म रोग दूर हो जाते है। मान्यता के अनुसार इस सरोवर की स्थापना रावण के दादा पुल्सत्य ऋषि ने कराया था। यहां पुल्सत्य ऋषि ने वर्षो तपस्या की थी। यहां बराही देवी की भी पूजा की जाती थी। बाद में बराही देवी मंदिर की स्थापना की गई और आज मेले का आयोजन किया जाता है। शिव मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी ने बताया कि 29 मार्च से लेकर 8 अप्रैल हर साल बराही मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
Published on:
10 Apr 2018 11:11 am
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