
ग्रेटर नोएडा. अथॉरिटी से 100 करोड़ रुपये की घास की कटाई का रेकॉर्ड गायब होने का मामला प्रकाश में आया है। घास की कटाई के मामले की जांच का जिम्मा सीईओ आलोक टंडन ने एसीईओ को सौंप दिया है। वहीं सीएजी की नजर भी टेढ़ी हो गई है। सीएजी की टीम ने घास की कटाई का बिल की कॉपी और प्रोजेक्ट की रिपोर्ट मांगी है। 2010-11 में घास की कटाई का मामला सीएजी के संज्ञान में आया तो उनके बिल टीम ने मांगे है। एसीईओ को एक माह में जांच कर रिपोर्ट सीईओ को सौंपनी है।
यूपी में सत्ता में आते ही योगी सरकार की नजर यमुना, ग्रेटर नोएडा और नोएडा अथॉरिटी पर टेढ़ी हो गई थी। योगी सरकार ने अथॉरिटी से जुड़े हर मामले की जांच सीएजी से कराना फैसला लिया था। फिलहाल सीएजी तीनों अथॉरिटी की जांच कर रही है। दरअसल में तीनों अथॉरिटी में पिछली सरकारों पर घोटाले करने के आरोप लगे थे। साथ ही प्रॉपट्री में लीज डीड चेंज करना का भी आरोप है। आरोप है कि कर्मिशयल सेक्टर की जमीन को अफसरों ने मनमाने तरीके से रेजीडेंशियल में बदल दिया। ऐसे तमाम मामलों की जांच करने में सीएजी जुटी है।
बताया गया है कि शहर के विभिन्न सेक्टरों और अन्य स्थानों से 100 करोड़ रुपये में घास की कटाई हुई थी। यहां 2010-11 घास की कटाई की गई थी। सीएजी फिलहाल 2005 से लेकर 2017 तक अथॉरिटी में हुए विकास कार्यो की जांच कर रही है। इस दौरान हुई घास की कटाई की फाइल नहीं मिल रही है। फाइल को लेकर अफसर भी सख्त हो गए है। दरअसल में सीएजी भी घास की कटाई की मामले की जांच भी कर रही है। ऐसे में उन्होंने बिल मांगे है और प्रोजेक्ट की पूरी डिटेंल। एसईओ को एक माह में जांच कर अथॉरिटी के सीईओ को रिपोर्ट देनी है।
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Published on:
11 Apr 2018 02:27 pm
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