
ग्रेटर नोएडा। मिट्टी की घटती गुणवत्ता व बढ़ते मरुस्थलीकरण पर चर्चा को लेकर ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्स्पो मार्ट में होने वाले कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज की शुरुआत सोमवार से हो गई। 2 से 13 सितम्बर तक चलने वाले इस कॉन्फ्रेंस में 197 देशों के राजनयिक बदलते पर्यावरण में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता को हो रहे नुकसान बढ़ते मरुस्थल जैसे विश्व के गंभीर समस्याओं पर चिंतन और मनन करेंगे। अपने अनुभवों, उपलब्धियों को एक दूसरे के साथ साझा करने के अलावा दुनिया भर के लिए चुनौती बन चुकी इस समस्या के समाधान का मसौदा तैयार करेंगे।
कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज की शुरुआत करते हुए केंद्रीय पर्यावरण व वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर इस चुनौती से निपटने के लिए तकनीक और मजबूत इरादों के साथ प्रयास करने की जरूरत अहम बताया। उन्होंने कहा कि मानवीय गतिविधियों के कारण जलवायु परिवर्तन धरती का क्षरण और जैव विविधता में जो क्षति हुई है उसे मानवीय प्रयासों से ही इस नुकसान की भरपाई कर स्थिति को सुधारा जा सकता है।
इस अवसर पर कार्यकारी सचिव इब्राहिम थियाव ने कहा कि वैज्ञानिक आकलन में सामने आया है कि सूखा, बाढ़, वनों में आग, भूमि का कटाव जैसी प्राकृतिक आपदाओं में बढ़ोतरी हुई है। यह खतरे का संकेत है। इसके प्रति सचेत रहते हुए कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि खाद्य समेत अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए दुनिया ने सत्तर फीसद जमीन का प्राकृतिक स्वरूप बदल दिया है। इससे करीब दस लाख प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो गया है। दीर्घकालिक प्रबंधन न करने की वजह से भूमि का काफी बड़ा भाग अनुपयोगी हो चुका है। जलवायु परिवर्तन की वजह से 2050 तक सात सौ मिलियन लोग पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे।
Updated on:
03 Sept 2019 02:50 pm
Published on:
03 Sept 2019 02:33 pm
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