
रेरा की स्थापना वर्ष 2017 में लखनऊ में और क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना 2018 में ग्रेटर नोएडा में की गई थी। इसका उद्देश्य रियल एस्टेट परियोजनाओं में पारदर्शिता लाना, विकासकर्ताओं की जवाबदेही तय करना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। संस्था सभी स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों से ईमानदारी और संवेदनशीलता की अपेक्षा करती है।
रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने जानकारी दी कि प्राधिकरण में काम की प्रकृति अत्यंत संवेदनशील है और कर्मचारियों की संख्या सीमित होने के बावजूद, उनके कार्यों की नियमित निगरानी की जाती है। इसी के तहत, पिछले कुछ वर्षों में आचरण और निष्ठा में कमी पाए जाने पर विभिन्न श्रेणियों के 12 कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया। इनमें 3 अवर अभियंता, 2 एल.सी.आर.ए., 1 सहायक लेखाकार, 4 कंप्यूटर ऑपरेटर, 1 हेल्प डेस्क कर्मी और 1 अनुसेवक शामिल हैं।
रेरा प्रत्येक कर्मचारी से सत्यनिष्ठा का शपथ-पत्र लेता है और कार्यालय परिसर में सभी कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से कर्मचारियों व आगंतुकों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। रेरा "जीरो टॉलरेंस" की नीति पर चलते हुए अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करता है। रेरा ने यह स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संस्था अपने उद्देश्यों से किसी भी प्रकार की चूक को बर्दाश्त नहीं करेगी और भविष्य में भी इसी तरह अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी जारी रखेगी।
गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों पहले ही ग्रेटर नोएडा में रेरा में काम करने वाले एक कर्मचारी को विजिलेंस की टीम और पुलिस की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा था और उसे जेल भेजा गया था। वह एक मामले को सुलझाने के नाम पर रिश्वत ले रहा था।
Published on:
29 Apr 2025 02:56 pm
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