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लेबनान के PM हरीरी सऊदी अरब से हुए रवाना, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से करेंगे मुलाकात

हरीरी पत्नी के साथ अपने निजी विमान से रियाद हवाईअड्डे से पेरिस के पास स्थित ले बोर्गेट हवाईअड्डे के लिए रवाना हो गए।

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Mohit sharma

Nov 18, 2017

met French President Emmanue

नई दिल्ली। लेबनान के प्रधानमंत्री साद हरीरी सऊदी अरब से फ्रांस के लिए रवाना हो गए हैं। बीबीसी ने फ्यूचर टीवी के हवाले से बताया कि हरीरी पत्नी के साथ अपने निजी विमान से रियाद हवाईअड्डे से पेरिस के पास स्थित ले बोर्गेट हवाईअड्डे के लिए रवाना हो गए। हरीरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलेंगे। बेरूत लौटने से पहले वह अन्य अरब देशों का भी दौरा कर सकते हैं।

पेरिस पहुंचेंगे हरीरी

राष्ट्रपति मैक्रों ने बुधवार को कहा था कि उन्होंने हरीरी और उनके परिवार को पेरिस आने के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, बाद में मैक्रों ने स्पष्ट किया कि वह हरीरी को राजनीतिक निर्वासन मुहैया नहीं करा रहे हैं बल्कि वह चाहते हैं कि हरीरी कुछ दिनों के लिए पेरिस में रहें। गौरतलब है कि हरीरी ने चार नवंबर को रियाद दौरे के दौरान अप्रत्याशित ढंग से इस्तीफे का ऐलान किया था, लेकिन उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया। बीबीसी के मुताबिक हरीरी ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए ईरान पर क्षेत्र में मतभेद और तबाही के बीज बोने का आरोप लगाया था। हरीरी ने कहा था कि उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है इसलिए वह सुरक्षा के मद्देनजर पद से इस्तीफा दे रहे हैं। इससे पहले हरीरी ने सऊदी अरब में खुद को बंधक बनाकर रखे जाने वाली खबरों का खंडन करते हुए इसे झूठ कहा था।

क्या है विवाद


बता दें कि पिछले दिनों लेबनान के पीएम हरीरी ने सऊदी अरब में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद आरोप लगाया जा रहा था कि हरीरी ने इस्तीफा अरब के प्रिंस के दबाव में दिया है। दरअसल, लेबनान में हरीरी और हजीबुल्ला गुट की मिलीजुली सरकार है। हरीरी सुन्नी और हजीबुल्ला सिया हैं। अब चूंकि सऊदी अरब एक सुन्नी देश है, तो हरीरी से उसके बेहतर संबंध हैं। वहीं सिया देश होने के नाते हजीबुल्ला गुट का सिया देश ईरान का समर्थन मिला हुआ है। इसका परिणाम यह है कि सीरिया सिविल वॉर हजीबुल्ला गुट सीरिया का साथ दे रहा है, जबकि सऊदी अरब इसके खिलाफ है। माना जा रहा है कि लेबनान में हजीबुल्ला गुट को कमजोर करने के लिए हरीरी के इस्तीफे के माध्यम से सउदी अरब ने वहां की सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया है।