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Anti-Hijab Protest:: यूएन मानवाधिकार परिषद करेगी ईरान में हिंसा की जांच, गठित किया जांच मिशन

UN Human Rights Council: संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद ने ईरान एक फैक्ट फाइंडिंग मिशन (Fact-Finding Mission) गठित किया है जो ईरान में एंटी-हिजाब प्रदर्शनों (Anti-hijab Protests) की स्वतंत्र जांच करेगा।

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Anti-Hijab Protest

यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क (Volker Turck) द्वारा ईरान में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध घातक हिंसा के लगातार प्रयोग की एक स्वतंत्र जांच की मांग उठाए जाने के बाद, जिनेवा स्थित यूएन मानवाधिकार परिषद ने 16 सितम्बर 2022 को शुरू हुए इन प्रदर्शनों के सम्बन्ध में एक स्वतंत्र जांच मिशन गठित किया है।

ईरान में बल का गैर-जरूरी उपयोग
यूएन न्यूज के अनुसार 22 वर्षीय महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में सितंबर में हुई मौत से पैदा हुए संकट के जवाब में एक विशेष सत्र में काउंसिल की बैठक में टर्क को 'उन लोगों की मानसिकता' की आलोचना करते सुना गया जिनके पास ईरान में 'शक्ति है'। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'बल का अनावश्यक और अनुपातहीन उपयोग' समाप्त होना चाहिए।

बच्चों को मारा गया, महिलाओं को पीटा गया
यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने विशेष सत्र में कहा, 'देश में जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर मुझे बहुत तकलीफ होती है। बच्चों के मारे जाने की तस्वीरें। रास्तों-सड़कों पर महिलाओं को पीटे जाने की तस्वीरें। लोगों को मौत की सजा देने की तस्वीरें। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और बसिज बलों ने विरोध के खिलाफ लाइव गोला-बारूद, बर्डशॉट और अन्य धातु की गोलियों, आंसूगैस और डंडों का इस्तेमाल किया है।

अकेले पिछले सप्ताह 70 मौतें
ईरान में मानवाधिकार स्थिति पर विशेष रैपोर्टेयर जावेद रहमान (Javaid Rahman) ने भी यूएन मानवाधिकार परिषद के इस 35वें सत्र को सम्बोधित करते हुए बताया कि कि प्रदर्शनकारियों की आवाजों को दबाने के प्रयास बीते सप्ताह के दौरान और ज्यादा हो गए हैं, जिनमें बच्चों के विरुद्ध कार्रवाई भी शामिल है। बीते सप्ताह 60 से 70 लोग मारे गए हैं जिनमें पांच बच्चे भी हैं।

150 शहरों में फैले प्रदर्शन, 300 की मौत
क्योंकि यह 150 शहरों और ईरान के सभी विश्वविद्यालयों में फैल गया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की नवीनतम जानकारी के अनुसार, हिजाब ठीक से नहीं पहनने के कारण 13 सितंबर को ईरान की तथाकथित नैतिकता पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद महसा अमिनी (Mahsa Amini) की मौत के बाद से विरोध प्रदर्शनों में 300 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें कम से कम 40 बच्चे शामिल हैं।