
दोपहर 12 बजे, 1 शिक्षक और 15 बच्चे
गुना/बमोरी. सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार ने जिले से लेकर ग्रामीण स्तर तक तमाम मॉनीटरिंग अधिकारी तैनात कर रखे हैं। जिनके भारी भरकम वेतन पर सरकार हर माह लाखों रुपए का बजट खर्च कर रही है।
इसके बावजूद सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में ज्यादा सुधार नहीं आ पा रहा है। जो शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकार से तीस से चालीस हजार रुपए प्रति माह वेतन ले रहे हैं वे बच्चों को पढ़ाने नियमित रूप से स्कूल नहीं जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के कई दूरस्थ स्कूलों का ताला तो शिक्षकों के न पहुंचने के कारण दोपहर 12 बजे तक खुल भी नही रहा है। स्टाफ की इस लेटलतीफी की वजह से स्कूलों में लगातार बच्चों की संख्या भी घटती जा ही है।
जानकारी के मुताबिक वर्तमान समय में शिक्षण व्यवस्था की सबसे बुरी स्थिति बमोरी विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की है। स्थानीय ग्रामीणों की शिकायत पर पत्रिका टीम ने सोमवार को ग्राम अमरोद के शासकीय माध्यमिक विद्यालय जाकर देखा तो दोपहर 12 बजे तक मात्र एक शिक्षक ही मौजूद था जबकि इस स्कूल में कुल 6 शिक्षक पदस्थ हैं।
स्कूल प्रांगण में 15 बच्चे उपस्थित मिले जबकि हाजिरी रजिस्टर के अनुसार यहां 205 विद्यार्थी दर्ज हैं। बताया गया कि उक्त स्कूल एकीकृत शाला के तहत लगता है। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय के कुल बच्चों की संख्या 205 है। मौके पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यहां पदस्थ तो 6 शिक्षक हैं लेकिन स्कूल के निर्धारित समय सुबह 10:30 बजे कोई भी शिक्षक नहीं आता है। यही नहीं स्कूल बंद होने का समय 4 बजे है लेकिन उक्त शिक्षक समय से काफी पहले ही निकल जाते हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई पर काफी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
दोपहर डेढ़ बजे तक नहीं आया एमडीएम
मॉनीटरिंग अधिकारियों की एक और हकीकत जिला मुख्यालय पर सामने आई। शहर के जाटपुरा स्कूल में सोमवार को मुश्किल से एक दर्जन बच्चे ही मौजूद थे। दोपहर डेढ़ बजे मध्यान्ह भोजन नहीं आया था। इसी तरह की स्थिति अन्य स्कूलों में देखने को मिली।
ग्रामीणों की जुबानी शिक्षण व्यवस्था की हकीकत
अमरोद स्कूल में पदस्थ शिक्षक अधिकांशत: लेट ही आते हैं और समय से पहले ही चले जाते हैं। न तो बच्चों का कोर्स पूरा हो पा रहा है और न ही उनकी पढ़ाई ठीक ढंग से हो रही है।
विष्णु किरार, ग्रामीण
शिक्षा विभाग के अधिकारी इस स्कूल का निरीक्षण करने अब तक नहीं आए हैं। जिसके कारण यहां पदस्थ शिक्षकों को किसी का डर नहीं है। इसलिए शिक्षकों में स्कूल लेट आने की आदत सी बन गई है।
नंदू अहिरवार, ग्रामीण
स्कूल के शिक्षक शासन से हर माह मोटी पगार ले रहे हैं। फिर भी बच्चों को ठीक ढंग से नहीं पढ़ा रहे। कक्षा 5 का बच्चा किताब भी ठीक से नहीं पढ़ पाता है। शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण करना चाहिए।
हल्के प्रजापति, ग्रामीण
शिक्षकों की मनमानी लगातार जारी है। इस ओर शिक्षा विभाग कोई ध्यान नहीं दे रहा। स्कूल की हालत सुधरने की बजाय बिगड़ती ही जा रही है। पढ़ाई ठीक ढंग से न होने के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने को मजबूर हैं।
नीरज किरार
स्कूल में बच्चों की कम संख्या को देखते हुए मैं गांव में बच्चों के अभिभावकों से संपर्क करने गया था। इसलिए स्कूल पहुंचने में पांच दस मिनट लेट हो गया था।
राजेश शर्मा, शिक्षक
यह बोले जिम्मेदार
आज सर्दी अधिक थी इसलिए लेट हो गए। सामान्यत: सभी शिक्षक स्कूल के निर्धारित समय तक आ जाते हैं।
केसर सिंह भिलाला, प्रधानाध्यापक
Published on:
02 Jan 2020 01:09 pm
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