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जमीन खोदी तो निकली 700 साल पुरानी बावड़ी, बुझेगी पूरे गांव की प्यास

-गुना से 18 किमी दूर तरावटा गांव में निकली है बावड़ी-11 मूर्ति भी निकलीं, 8 जून से होगी यहां भागवत कथा

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गुना

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Amit Mishra

Jun 04, 2019

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जमीन खोदी तो निकली 700 साल पुरानी बावड़ी, बुझेगी पूरे गांव की प्यास

गुना @मोहर सिंह लोधी की रिपोर्ट...
जिला मुख्यालय से 18 किमी दूर तरावटा गांव में जमीन खोदने पर 700 साल पुरानी 45 फीट गहरी बावड़ी मिली है। इसमें नक्काशीदार पत्थर के साथ 11 मूर्तियां भी निकली हैं, जो 11वीं-12वीं सदी की बताई जातीं है।


बावड़ी से मिट्टी निकलते उसमें पानी आ गया है। गांव में जब 55 फीट गहरे कुएं सूख गए हैं, ऐसे समय में इस बावड़ी में 6 फीट पानी भरा है, जिससे पूरे गांव की प्यास बुझ सकेगी। बावड़ी को पुर्नजीवित करने का काम गांव के ही डा. योगेश कुशवाह ने किया है, जो इंदौर में रहते और हर महीने बावड़ी को देखने गांव आते हैं।

ऊमरी के राजा रहते थे गांव में
ग्रामीणों का दावा है कि ऊमरी से पहले तरावटा गांव अस्तित्व में आया। ऊमरी के राजा यानी शिवप्रताप सिंह के पूर्वज यहां कभी रहे होंगे। तब ये बावड़ी अस्तित्व में आ गई थी। लेकिन पिछले एक सदी से बांवडी की जगह केवल एक दो फीट गहरा गड्ढा था और बावडी चौसरिया परिवार की भूमि पर बनी हुई थी। बावड़ी को लेकर ग्रामीणों में कई तरह किवदंतियां हैं।


बावड़ी पर खर्च कर चुके 4 लाख
चौसरिया परिवार का एक बेटा योगेश कुशवाह और उसकी पत्नी वंदना डाक्टर हैं। वे उनकी शादी में कुल देवता की पूजा करने आए थे और उन्होंने अपनी कमाई से बावड़ी को खुदवाने का काम लगा दिया। अक्टूबर-नवंबर 2018 से अब तक वे 4 लाख रुपए खर्च कर चुके हैं। बावड़ी को 10 फीट गहरा करने के साथ उसका सौंदर्यीकरण करेंगे, तो आने वाली पीढिय़ों की प्यास बुझती रहे।

गांव के अधिकांश स्त्रोत सूख गए
गांव में एक और बावड़ी है, जो कोटिया परिवार की है। वह मिट्टी से भर चुकी है। मंदिर के पास 55 फीट गहरा एक कुआ है, जो 1884 में बनी था। गांव में पांच हैंडपंप हैं, इनमें से तीन जलस्तर गिरने से बंद हो गए। मौजूदा समय में पूरा गांव भीषण जल संकट की चपेट में है।


बावडी पर 8 जून से भागवत
उधर, इस बावड़ी को लेकर पूरा गांव उत्साहित है। गांव में कुशवाह समाज के करीब 80 परिवार हैं और 8 जून से यहां व्यापक स्तर पर भागवत कथा होगी। इस धार्मिक आयोजन से लोगों को अपनी प्राचीन धरोहर को गुना और आसपास के लोगों को चरिचित कराएंगे।


इनका कहना है
बावडी चौसरिया परिवार की है। चार पीढिय़ों से बावड़ी मिट्टी में दबी थी। दो माह में उसकी मिट्टी निकाल पाए। वर्षों पहले बावड़ी के आकर्षक पत्थर कोई निकाल ले गया।
-पर्वत सिंह कुशवाह


देवों का स्थान है। डा. योगेश कुशवाह इसको खुदवा रहे हैं। गांव में जल संकट है। ये बावड़ी गांव की प्यास बुझाने में सहायक होगी।
-लल्लीराम कुशवाह