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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : गुना की महिलाओं ने साबित किया स्वयंसिद्धा, हासिल की अलग-अलग क्षेत्र में उपलब्धियां

खेल से लेकर उद्योग तक, हर क्षेत्र में बनाई अलग पहचान

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : गुना की महिलाओं ने साबित किया स्वयंसिद्धा, हासिल की उपलब्धियां

श्वेता गुप्ता

गुना . जिले की कई महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और क्षमताओं के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। खेल, उद्योग, व्यापार, संगीत, नृत्य, चित्रकला, संस्कृति, साहित्य से लेकर विभिन्न विधाओं में शहर की महिलाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहराया है। महिला दिवस के मौके पर हम शहर की ऐसी ही कुछ खास महिलाओं से आपको रूबरू करा रहे हैं।

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खेल, शिक्षा, व्यवसाय के क्षेत्र में इन्होंने बढ़ाया मान

लक्ष्मी ओझा स्टूडेंट और शिक्षक दोनों की भूमिका निभा रहीं

आरोन विकास खंड की ग्राम पंचायत बारोद निवासी लक्ष्मी ओझा स्टूडेंट होने के साथ-साथ शिक्षक की भूमिका निभा रही हैं। खास बात यह है कि लक्ष्मी पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गई हैं। जबसे से उन्होंने कक्षा 9 में बरखेड़ाहाट के सीएम राइज स्कूल में प्रवेश लिया। इसके बाद गांव की उन लड़कियों ने गांव से दूर स्कूल जाना शुरू कर दिया जो इससे पहले कक्षा 8 के बाद लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती थी। इससे पहले न तो माता-पिता की मानसिकता अपनी बेटियों को गांव से बाहर स्थित स्कूल में पढ़ाई के लिए भेजने की थी और न ही लड़कियां हिम्मत जुटा पाती थीं। लेकिन लक्ष्मी को प्रतिदिन बरखेड़ाहाट स्कूल में पढ़ने जाते देख सभी लोग प्रभावित हुए। जिसके बाद बरखेड़ाहाट में लड़कियों की संख्या बढ़ गई। लक्ष्मी ओझा ने पत्रिका को बताया कि उन्होंने कक्षा 8 वीं तक की पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल में की। इस दौरान उनके शिक्षक जितेंद्र ब्रह्मभट्ट की एक सीख ने उनकी सोच ही बदल दी। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी तुम्हें माता-पिता की कमजोरी नहीं ताकत बनकर दिखाना है। इसके लिए उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। लक्ष्मी जब खुद कक्षा 9 में पढ़ती थीं तब वह अपने गांव के कक्षा 1 से 5 वीं तक के और जब कक्षा 11 वीं में आ गईं तब कक्षा 8 तक के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। बता दें कि स्कूल में लक्ष्मी ने पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक एवं अन्य सह शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की। जिसे देखते हुए विद्यालय ने उन्हें स्टूडेंट ऑफ द ईयर सम्मान से नवाजा। आज लक्ष्मी अपने स्कूल ही नहीं गांव में सभी के लिए आदर्श उदाहरण बन गई हैं। लक्ष्मी की मां शशि और पिता ने बताया कि परिवार में लक्ष्मी सबसे बड़ी है। उसका छोटा भाई शुरूआत में पढ़ाई में कुछ कमजोर था तो उसने उसे भी पढ़ाकर 10 वीं पास करा दिया। उन्हें अपनी बेटी पर बहुत नाज है।

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देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने गांव छोड़ा

जिले के छोटे से कस्बे जामनेर निवासी सिमरन खान का लक्ष्य है एथलेटिक्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना। इसकी तैयारी के लिए सिमरन अपना गांव छोड़ गुना शहर में रहकर एथलेटिक्स की तैयारी में जुटी हैं। अपने जोश और जुनून को अपने साथ लेकर परिवार के विश्वास के दम पर जामनेर कस्बे से गुना में रहकर अपने सपने को पूरा करने के लिए सुबह शाम ग्राउंड पर अपना समय दे रही हैं। सिमरन यह प्रयास इस मायने में खास है क्योंकि वह जिस वर्ग से आती हैं, उसमें लड़कियों को घर छोड़कर कॅरियर के लिए इतनी आजादी सामान्यत: नहीं मिल पाती। सिमरन खान की प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में कुंभराज में आयोजित मैराथन में लड़कियां तो क्या लड़के भी उसके आसपास नहीं थे। इस दौड़ में वह विजेता रहीं थी।

जामनेर निवासी पिता बब्बन खान एवं मां रहीसा बानो घर जन्मी सिमरन खान गुना की लड़कियों की प्रेरणा का केंद्र बनी है। सिमरन खान अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और बहन भाई सभी को देती हैं। क्योंकि उन्होंने आसपास समाज सब के ताने सुनकर भी हार नहीं मानी और बेटी को बाहर जाने दिया।

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गुना में क्रिकेट की आधार स्तंभ हैं श्वेता गुप्ता

जिले की बेहद प्रतिभाशाली होनहार खिलाड़ी श्वेता गुप्ता गुना में महिला क्रिकेट की आधार स्तंभ हैं। क्योंकि यहां की एकेडमी में क्रिकेट सीखने वाली श्वेता पहली महिला खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2 फरवरी 2017 में अकेडमी ज्वाइन की। इसके बाद तीन साल तक अन्य महिला क्रिकेट खिलाड़ी न होने के बाद भी उन्होंने उसी ललक के साथ क्रिकेट को सीखा। उस समय के हालात को देखते हुए एकेडमी के कोच राजू राय ने श्वेता से कहा था कि अभी हमारी एकेडमी में पुरुष खिलाड़ी के अलावा महिला खिलाड़ी नहीं हैं। आप इंतजार कर सकती हैं। आपको यदि इन हालातों में क्रिकेट सीखना है तो आप स्वयं को लड़की की जगह लड़का और मुझे लड़का की जगह लड़की समझना होगा तभी आप क्रिकेट को अच्छे से सीख सकते हैं। श्वेता ने क्रिकेट को कक्षा 11 वीं में ज्वाइन किया। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट को इतने अच्छे से सीखा कि उनका बहुत कम समय में ही जीवाजी यूनिवर्सिटी की टीम से नेशनल वेस्ट जोन महिला क्रिेकेट प्रतियोगिता के लिए चयन हो गया। जिसमें उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि उन्हें इस मंच पर खेलने का मौका दूसरी बार भी मिला। महिला क्रिकेट के क्षेत्र में श्वेता की उपलब्धियों में चंबल डिवीजन की सीनियर महिला क्रिकेट टीम से एमपीसीए द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय टूर्नामेंट जेएस आनंद ट्रॉफी 2022 में सहभागिता करना है। श्वेता के कोच का कहना है कि एकेडमी में खिलाड़ियों की संख्या काफी है लेकिन श्वेता का क्रिकेट के प्रति समर्पण के अलावा अनुशासन और आज्ञाकारी होना उन्हें दूसरे सभी खिलाड़ियों से अलग करता है। बता दें कि लेदर बॉल क्रिकेट में श्वेता का प्रदर्शन बेहद उत्कृष्ट है।

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गंगा ने खुद आत्मनिर्भर बन, 11 अन्य महिलाओं को दिया रोजगार

कलेक्टोरेट परिसर में कैंटीन संचालित करने वाली गंगा महिला सशक्तिकरण का बड़ा उदाहरण है। मुहालपुर कॉलोनी निवासी 30 वर्षीय गंगा पत्नी गंगाविशन अहिरवार उमा स्वसहायता समूह को संचालित कर पहले खुद आत्मनिर्भर बनी। अब उसी के जरिए समूह की 11 अन्य महिलाओं के साथ कैंटीन संचालित कर उन्हें भी रोजगार दे दिया है। यहां साल 2019 से कैंटीन संचालित कर रही गंगा बताती हैं कि उनके समूह से जुड़ी लच्छोबाई, रामप्यारी, अनीता, राधा, मनीषा, मोहरबाई, परमोबाई, गणेशीबाई, तुरषा, रचना राजकुमारी आदि महिलाएं भी अब 300 रुपए प्रति दिन के हिसाब से इसी कैंटीन से कमा रही हंै। हालांकि कोविड-19 के दौरान समूह की महिलाओं को अपना व अपने घर का खर्च चलाना काफी मुश्किल साबित हुआ लेकिन कोविड के बाद 2022 से अपनी कैंटीन को पुन: शुरू कर स्थापित किया। अब समूह की अध्यक्ष 400 रुपए प्रतिदिन व अन्य 11 महिला सदस्य 300- 300 रुपए प्रतिदिन से हिसाब से इसी कैंटीन से मुनाफा कमाकर स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं।