सिंधिया की कांग्रेस से दूरी! और सिंधिया परिवार से जुड़े कुछ खास राज क्या आप जानते हैं?

- सिंधिया का महल: करीब 150 साल पहले एक करोड़ का बना था यह महल,हाथियों से नापी थी छत की मजबूती

- 400 कमरे हैं महल में,यहां के रॉयल दरबार हॉल की छत से 140 साल से साढ़े तीन टन का झूमर टंगा हुआ है।

- यह सुनने में ही नहीं देखने के बाद भी आज के जमाने में अजूबा ही लगता है।

गुना। भले ही सिंधिया ने अपने आॅफीशियल ट्विटर से कांग्रेस का नाम या पूर्व सांसद लिखा हटा दिया है। लेकिन यहां उन्होंने अब अपने को एक समाजसेवक व क्रिकेट प्रेमी के रूप में दिखाया है। लेकिन क्या आप ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने पिता माधवराव सिंधिया के देहावसान के बाद ही कांग्रेस को ज्वाइन किया था।

इसके बाद से ही वे अपने तकरीबन हर भाषण में स्वयं को समाजसेवक ही बताते रहे। यहां तक की 2019 में चुनाव के दौरान तक वे ये ही कहते रहे कि में समाज सेवक हूं। और तो और उनके समर्थक भी उन्हें नेता से ज्यादा समाजसेवी ही मानते हैं।

यहां तक की वह क्षेत्र जहां से वे चुनाव लड़ते थे यानि गुना के तक कई लोगों का मानना है कि सिंधिया सच्चे जनसेवक हैं। वे पहले से ही कहते आए हैं। पद की लालसा नहीं है। वे राजनीति में भी सेवा के लिए आए हैं। वहीं कुछ लोगों की मानें तो सिंधिया सांसद और मंत्री रहे, उन्हें कभी लालबत्ती का मोह नहीं रहा। लोग यहां तक कहते हैं कि सिंधिया परिवार का हमेशा समाज से जुड़ाव रहा है और वे सच्चे समाजसेवी हैं। वे समाजिक व्यक्ति हैं।

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जानिये सिंधिया परिवार से जुड़ी कुछ खास बातें...
क्या आप किसी ऐसे महल के बारे में जानते हैं?, जो करीब 150 साल पहले बना हो। लेकिन उसकी रंगोरोगत आज भी ऐसी हो कि देखने वाले को ऐसा लगे, जैसे अभी कुछ ही समय पहले यह बना हो।

जी हां, हम बात कर रहे हैं जय विलास पैलेस की एक ऐसा महल जो करीब 150 साल पुराना है। इसमें 400 कमरे हैं, लेकिन इतना पुराना होने के बावजूद यह महल आज भी जहां एक ओर लोगों को आकर्षित करता है, वहीं यहां अभी भी इस महल का निर्माण कराने वाले राजवंश का परिवार निवास करता है। यह कोई आम महल नहीं है, करीब 150 साल पहले इसे बनाने का खर्च 1 करोड़ रुपए आया था।

इतना ही नहीं इस महल की मजबूती नापने के लिए उस समय करीब 10 हाथियों की मदद तक ली गई थी। इसे दूर से देखने पर एक बार तो महल ऐसा लगता है मानो संगमरमर का बना हो।

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कभी देश की सबसे बड़ी रियासतों में शुमार रही ग्वालियर रियासत के आखिरी शासक सिंधिया राजवंश की मौजूदा पीढ़ी यानि ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनका परिवार जयविलास 1874 में बनाए गए इस पैलेस में रहता है ।

इस महल में 400 कमरे हैं। वहीं इमारत के 40 कमरों के एक हिस्से को अब म्यूजियम का रूप दे दिया गया है। जीवाजी राव सिंधिया म्यूजियम में सिंधिया राजवंश और ग्वालियर की ऐतिहासिक विरासत को सहेज कर रखा गया है। किसी हॉल में राजसी शान लाना हो तो छत पर झाड़-फानूस का होना जरूरी है।

जयविलास पैलेस के रॉयल दरबार हॉल की छत से 140 साल से साढ़े तीन टन का झूमर टंगा हुआ है, यह सुनने में ही नहीं देखने के बाद भी आज के जमाने में अजूबा ही लगता है। ग्वालियर के जयविलास पैलेस के इस हॉल में ऐसे कई झाड़-फानूस जोड़े में टंगे हैं। दुनिया के सबसे बड़े झाड़-फानूसों में शुमार ये फानूस महाराजा जयाजी राव ने खासतौर पर बेल्जियम के कारीगरों से बनवाए थे।

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40 कमरे म्यूजियम :
महल के 40 कमरे म्यूजियम के तौर पर रखे गए हैं, जिसमें महल के अंदर की गैलरी, उस समय प्रचलित अस्त्र-शस्त्र, उस समय प्रयुक्त होने वाली डोली एवं बग्घी और कांच के पायों पर टिकी सीढिय़ों की रेलिंग म्यूजियम के रूप में दिखाई गई हैं। महल की ट्रस्टी ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया हैं।


पैलेस से जुड़ी कुछ खास बातें...

: 400 कमरे वाला यह महल पूरी तरह व्हाइट है और यह 12 लाख वर्ग फीट में बना है। 1874 में बनाया गए इस महल की उस वक्त 1 करोड़ रुपए कीमत थी।

: इस पैलेस में 400 कमरे हैं, जिनमें से 40 कमरों में अब म्यूजियम है।

: इसके डाइनिंग हॉल में चांदी की ट्रेन है, जो खाना परोसने के काम आती थी।

: इस पैलेस के अहम हिस्से दरबार हॉल की छत से 140 सालों से 3500 किलो का झूमर टंगा है।

: दुनिया के सबसे बड़ झूमरों में शामिल इस झूमर को बेल्जियम के कारीगरों ने बनाया था।

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जय विलास महल की खासियत :
: जयविलास पैलेस 1874 में बनाया गया था।

: 400 कमरे वाला यह महल पूरी तरह व्हाइट है और यह 12 लाख वर्ग फीट में बना है।

: उस समय इसकी कीमत 1 करोड़ रुपए थी।

: इस पैलेस में 400 कमरे हैं, जिनमें से 40 कमरों में अब म्यूजियम है।

: 12,40,771 वर्ग फीट में बना है जय विलास पैलेस।


हाथियों से नापी थी छत की मजबूती...

: इन झूमरों को छत पर टांगने से पहले इंजीनियरों ने छत पर 10 हाथी चढ़ाकर देखे थे कि छत वजन सह पाती है या नहीं।

: यह हाथी 7 दिनों तक छत की परख करते रहे थे, इसके बाद यह झूमर लगाया गया था।

प्रिंस एडवर्ड के स्वागत में बनवाया :

: सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव 8 साल की उम्र में ग्वालियर के महाराज बने थे। बड़े होने पर जब इंग्लैंड के शासक एडवर्ड-vii का भारत आना हुआ तो महाराज ने उन्हें ग्वालियर इनवाइट किया।

: उनके स्वागत के लिए ही उन्होंने जयविलास पैलेस को बनाने प्लानिंग की। इसके लिए फ्रांसीसी आर्किटेक्ट मिशेल फिलोस को अपोइंट किया।

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दीपेश तिवारी
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