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जननी सुरक्षा योजना : संस्थागत प्रसव के बाद भी नहीं मिली हजारों हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि

- सॉफ्टवेयर अपडेशन के कारण प्रक्रिया बीच में ही उलझी- सैकड़ों हितग्राहियों की डुप्लीकेट बन गई आईडी तो कईयों का पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं- राशि लेने हितग्राही के परिजन अस्पताल के लगा रहे चक्कर- कई हितग्राही दूसरे जिले के भी

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जननी सुरक्षा योजना : संस्थागत प्रसव के बाद भी नहीं मिली हजारों हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि

जननी सुरक्षा योजना : संस्थागत प्रसव के बाद भी नहीं मिली हजारों हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि

गुना. मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों को शत प्रतिशत नहीं मिल पा रहा है। गुना जिले में इसके क्रियान्यन में पिछले काफी समय से कई तरह की व्यवहारिक और तकनीकी अड़चनेें सामने आ रही हैं। यही कारण है वर्ष 2020 से अब तक जिले में हजारों पात्र हितग्राहियों को जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि अब तक नहीं मिल सकी है। महिला व उनके परिजन आए दिन अस्पताल सहित बीएमओ व सीएमएचओ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। अधिकारी या तो हितग्राहियों द्वारा दिए गए दस्तावेजों में कमी बता देते हैं या फिर प्रशासनिक स्तरपर तकनीकी कमी। कुल मिलाकर योजना के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही का खामियाजा हजारों हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक असुरक्षित प्रसव की वजह से किसी महिला की मौत न हो तथा बच्चा भी स्वस्थ रहे। इसी मंशा से सरकार ने वर्ष 2005 में जननी सुरक्षा योजना लागू की थी। इसका दूसरा उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ाना था। इसके लिए सरकार ने न सिर्फ नि:शुल्क जननी सुरक्षा वाहन व्यवस्था भी लागू की। जो वर्तमान में 108 जननी के रूप में संचालित है। इसके अलावा गर्भवती महिला सहित प्रेरक के रूप में आशा कार्यकर्ता व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को अलग से प्रोत्साहन राशि दिया जाना भी सुनिश्चित किया गया है। लेकिन इसके लिए शासन द्वारा निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी है। जिसकी सबसे पहली शर्त शासन द्वारा तय किए गए पोर्टल पर गर्भवती महिला का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है। इसकी प्रक्रिया आंगनबाड़ी केंद्र से ही शुरू होती है। लेकिन इस काम में प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। जिसके कारण गरीब व पात्र महिलाओं को शासन की जनहितैषी जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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सॉफ्टवेयर अपडेशन में अटकी हजारों हितग्राहियों की आईडी
जिला अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनके पास जो रिकार्ड है, उसमें वर्ष 2020 से लेकर अब तक हजारों हितग्राही ऐसे हैं, जिनका अब तक भुगतान नहीं हो सका है। इसके अलग-अलग कारण हैं। इनमें जो एक साल पुराने हितग्राही हैं उनके भुगतान में आई रुकावट का कारण जरूरी दस्तावेज पूर्ण न होना है। जैसे कि किसी महिला का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नंबर (आरसीएच) नहीं है तो किसी का बैंक एकाउंट आधार और मोबाइल से लिंक नहीं है। इसके अलावा वर्ष 2021 में सॉफ्टवेयर अपडेशन एक प्रमुख वजह सामने आई है। सीएमएचओ कार्यालय से बताया गया कि इस काम में जिस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा था, उसके अपडेशन की प्रक्रिया उच्च स्तर से अंजाम दी गई। इसी दौरान स्वास्थ्य संस्थाओं पर हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि भुगतान के लिए उक्त सॉफ्टवेयर पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अंजाम दी गई। संस्थाओं पर काम करने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटर्स ने समझा कि यह काम पूरा हो गया है। लेकिन आगामी माह से जब हितग्राही खाते में राशि न पहुंचने की शिकायत लेकर अस्पताल व सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे तो मामले की पड़ताल की गई। जिसमें सामने आया कि सॉफ्टवेयर अपडेशन की वजह से प्रक्रिया अटक गई। जिसके बाद स्वास्थ्य संस्थाओं ने फिर हितग्राहियों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अंजाम दी। लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ। फिर से पता किया तो सामने आया कि एक हितग्राही की दो-दो आईडी बन गई हैं। ऐसे में जब तक एक आईडी डिलीट नहीं होगी तब तक भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी।
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किसे कितनी मिलती है प्रोत्साहन राशि
ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं : जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत वह सभी महिलाएं जो गर्भवती हैं और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती हैं। उन्हें सरकार द्वारा 1400 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा आशा सहयोगी को प्रसव प्रोत्साहन के लिए 300 रुपए तथा प्रसव के बाद सेवा प्रदान करने के लिए 300 रुपए दिए जाते हैं।
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शहरी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं : इस योजना के अंतर्गत सभी गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय पर 1000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अलावा आशा सहयोगी को प्रसव प्रोत्साहन के लिए 200 तथा प्रसव के बाद सेवा प्रदान करने के लिए 200 रुपए दिए जाते हैं।
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मदद के लिए बनाई गई हेल्प डेस्क का नंबर बंद
गर्भवती महिलाओं की हर तरह से मदद करने के लिए जिला अस्पताल परिसर में काफी समय से सुमन हेल्प डेस्क संचालित है। लेकिन इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है। यहां तक कि अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाएं व उनके अटैंडरों को इस संबंध मेें बताया जाता है। खास बात यह है कि हेल्प डेस्क मेटरनिटी वार्ड से काफी दूर तथा फस्र्ट फ्लोर पर संचालित है। जहां न तो किसी की नजर पड़ती है और न ही गर्भवती महिलाएं सीढिय़ां चढ़कर जा पाती हैंं। यहां बता दें कि इस सुमन हेल्प डेस्क पर पदस्थ स्टाफ को मेटरनिटी विंग व भोपाल स्तर से उन हितग्राहियों की लिस्ट दी जाती है जिनका किसी कारण से भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे हितग्राहियों को यहां का स्टाफ फोन लगाकर जानकारी देता है। लेकिन जब इस डेस्क की हकीकत पता की गई तो सामने आया कि जो नंबर प्रशासनिक स्तर से इन्हें दिया गया है, वह काफी समय से बंद है। जिस नेटवर्क का नंबर दिया गया है वह अक्सर नहीं लगता।
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योजना का लाभ लेने यह दस्तावेज जरूरी
आवेदिका का आधार कार्ड
बीपीएल राशन कार्ड
पते का सबूत
निवास प्रमाण पत्र
जननी सुरक्षा कार्ड
सरकारी अस्पताल द्वारा जारी डिलीवरी सर्टिफिकेट
बैंक अकाउंट पासबुक
मोबाइल नंबर
पासपोर्ट साइज फोटो
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ेमेरी डिलेवरी जिला अस्पताल गुना में 16 फरवरी 2021 को हुई थी। अस्पताल में भर्ती रहते समय ही सभी दस्तावेज जमा कर दिए थे। 6 महीने में भी जब खाते में प्रोत्साहन राशि नहीं आई तो जिला अस्पताल जाकर पता किया तो कहा गया कि तुम्हारा आरसीएच नंबर नहीं है। जिसे भी उपलब्ध करा दिया। इसके दो माह बाद भी भुगतान नहीं तो फिर से अस्पताल जाकर पूछा तो कहा कि सॉफ्टवेयर अपडेशन की वजह से तुम्हारी दो-दो आईडी बन गई हैं, अब तुम्हें एक आईडी डिलीट करवानी पड़ेगी तब ही भुगतान संभव हो पाएगा। पूरा एक साल हो गया लेकिन पैसे नहीं मिल सके।
विजय कुमारी, हितग्राही
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मैं शिवपुरी जिले का रहने वाला हूं। लेकिन मेरे गांव से गुना जिला अस्पताल की दूरी कम है। साथ ही डॉक्टर ने जांच उपरांत
गर्भावस्था में जटिलता बताई इसलिए भी डिलेवरी गुना में ही कराना उचित समझा। यहां से डिस्चार्ज होने से पहले सभी जरूरी कागज जमा करा दिए थे। लेकिन 13 महीने बाद भी खाते में पैसे नहीं आ सके हैं। कई बार गुना आकर अधिकारियों से मिला लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।
प्रद्युम्न, परिजन