
गुना। जीवन एक संघर्ष है और उसी संघर्ष में हमें शांति खोजना है यह जो हम सांस ले रहे हैं वह संघर्ष है मौत के साथ हम हैं कि जिंदा रहना चाहते हैं छोटे से छोटा कीट कहीं भी मौन हो वह भी अपने प्राणों को बचाता है । सांप नेवले को डस लेता है तब थोड़ी देर के लिए वह चला जाता है बाद मैं जड़ी.बूटी सूंघ लेता है और जड़ी से जहर खत्म हो जाता है । इसके बाद नेवला सांप को मार डालता है ।
जिंदगी सांप नेवले की लड़ाई के समान है । संसार ही सांप है और संसार जब -जब डसता है जीवन में विष फैलने लगता है क्रोध, वासना, लालच यह सब बिल के समान है । त्वरित भक्ति को भागवत रूपी जड़ी-बूटी को सूंघ लेना चाहिए फिर तरो ताजा हो जाता है ।यह बात रमेश ओझा ने भार्गव कॉलोनी स्थित भार्गव कृषि फार्म हाउस पर चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन कही। कथा के प्रारंभ में आयोजकों ने कथा वाचक संत रमेश भाई ओझा का स्वागत किया।
उन्होंने भागवत ज्ञान की गंगा बहाते हुए कहा कि हमें सतत संघर्ष में लगे रहना चाहिए । भक्ति मार्ग के साधक को यह याद रखना चाहिए कि भगवान हमारे साथ है। श्री कृष्ण अपने सखा को लड़ाई में अकेला नहीं छोड़ते । अर्जुन कहते हैं गांडिव मेरे हाथ में हो और आप मेरे साथ हो तो हम विश्व को जीत सकते हैं । व्यक्ति मोह में कर्तव्य चित हो जाता है । रामायण में रावण मोह का प्रतीक है महाभारत में धृतराष्ट्र मोह का प्रतीक है मोह समस्त उपद्रवों की जड़ है । मोह का क्षय हो जाए वही मोक्ष है ।
संत रमेश भाई ओझा का कहना था कि राम धर्म रथ पर सवार होकर युद्ध लड़े । शौर्य और धर्म रथ के दो पहिए हैं सत्य और सील ध्वज पताका है व्यक्ति में अहंकार और लघुता यह दो तरह की बीमारी होती है । भक्ति के अंदर भगवान वेद भी हैं वैध भी है। भारतीयों के पास रामायण एभागवत गीता ना होती तो कुछ भी ना होता यह हमारे राष्ट्र की धरोहर है । रामायण जीवन की आचार संहिता है।
हमारे जीवन में रोल मॉडल होना चाहिए । स्कूल कॉलेजों से तो रामायण भागवत गीता हटा दी गई है । लेकिन अगर यह जीवन से हटा दी जाएं तो देश मुर्दा हो जाता । जीवन एक संघर्ष है सतत चलने वाला युद्ध समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है । गीता मोह को मिटाती है ।गृहस्थ और युवाओं को गीता अवश्य पढऩा चाहिए। इस कथा का श्रवण करने दूर-दराज से आए हैं।
Published on:
19 Dec 2019 12:48 pm
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