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सूखी नदी में गड्ढा खोदा तो फूट पड़ा पानी, अफवाह उड़ गई कि ये पानी पीने से नहीं होगा कोरोना, देखते ही देखते उमड़ पड़ी भीड़

कोरोना के डर से लोगों पर हावी हुआ अंधविश्वास, जमीन से निकल रहा गंदा पानी पीकर ही समझ रहे कोरोना का इलाज हो गया।

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सूखी नदी में गड्ढा खोदा तो फूट पड़ा पानी, अफवाह उड़ गई कि ये पानी पीने से नहीं होगा कोरोना, देखते ही देखते उमड़ पड़ी भीड़

गुना/ मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण लोगों पर किस कदर हावी हो चुका है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, सूबे के गुना जिले में एक छोटी सी अफवाह इतनी तेजी से इलाके में फैली कि, लोगों ने अंधविश्वास में आकर जमीन का गंदा पानी ही पीना शुरु कर दिया। अंधविश्वास की भेंट चढ़कर अब तक सैकड़ों की संख्या में कोरोना से डरे हुए लोग यहां का गंदा पानी पी चुके हैं।

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सूखाग्रस्त इलाके में निकला पानी, तो लोगों ने ज्यादा चल्दी माना चमत्कार

घटना बमोरी ब्लॉक के जोहरी गांव के जंगल की है। खास बात ये है कि, जिले के इस इलाके को सूखाग्रस्त माना जाता है। यही वजह है कि, यहां पानी निकलने को ही चमत्कार मान लिया गया और इसके बाद उसे कोरोना के इलाज से जोड़ने से उस अपवाद में चार चांद लग गए। यानी डर और आस्था के मिश्रण ने अंधविश्वास को लोगों पर पूरी तरह से फिट कर दिया। आपको बता दें कि, जिस इलाके में पानी निकल रहा है, वहां एक बरनी नामक नदी हुआ करती थी, लेकिन सूखा ग्रस्त पड़ने के बाद ये नदी भी पूरी तरह सूख गई। लेकिन, बीते दिनों संयोग वश एक व्यक्ति ने इसकी जमीन में गड्‌ढा यानी झिरी खोदी, तो अचानक जमीन में से गंदे पानी का रिसाव होने लगा। बस इसे ही लोगों के बीच चमत्कार बनाकर उड़ा दिया गया।

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ये अफवाह उड़ाई गई

अफवाह ये है कि, इसे पीने से कोरोना भाग जाएगा। फिर क्या था, ये अफवाह चंद दिनों के भीतर ही इलाके में इतनी तेजी से फैली कि, यहां लगातार सैकड़ों लोग जमीन से फूट रहा मिट्टी वाला गंदा पानी पीने के लिये उमड़ रहे हैं। इस संबंध में जब तक जिला प्रशासन को जानकारी लगी, तब तक हालात ये हो चुके थे कि, उससे सथितियों को संभालना भी मुश्किल हो रहा है। जबकि, जिला प्रशासन का कहना है कि, इस गंदे पानी को पीने से कोरोना तो किसी भी शर्त पर नहीं भागेगा, बल्कि दूसरी बीमारियां होने का डर जरूर है।

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पटवारी समझाइश दे-देकर थक गए, लोग मानने को तैयार नहीं

इलाके के पटवारी महेंद्र सिंह धाकड़ को जब इस संबंध में सूचना मिली, तो वो तत्काल ही मौके का जायजा लेने पहुंचे, अपनी तफ्तीश में उन्होंने पाया कि, जमीन से निकल रहा पानी बेहद दूषित है। इसके बाद उन्होंने लोगों को काफी समझाइशदेने की कोशिश भी की, लेकिन लोगों पर अब तक ये अंधनिश्वास इतना हावी हो चुका है कि, वो पटवारी की बात मानने को तैयार ही नहीं।

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इतनी साधारण सी बात भी नहीं समझ पा रहे लोग

वहीं, भूगोल विशेषज्ञों की मानें, तो किसी भी नदी में भले ही पानी सूख जाए, लेकिन उसकी निचली सतह पर पानी हमेशा मौजूद रहता है। जरा सा गड्ढा खोदने पर भी ये दिखाई देने लगता है। बरनी नदी के मामले में भी कुछ यही हुआ है। यहां भी सतह पर पानी सूखा हुआ है, लेकिन जमीनी सतह के नीचे इसका रिसाव अब भी बना हुआ है। किसी ने गड्ढा खोदा होगा और निचे छिपी जलधारा ऊपर आ गई, ये एक साधारण सी बात है, इसमें चमत्कार जैसा कुछ नहीं। इस नदी के दोनों और घाना जंगल है। जिस जगह पानी निकला है, वहां नदी सबसे ज्यादा गहरी है। ऐसे में वहां पानी निकलना कोई बड़ी बात नहीं। इन सभी तर्कों के बावजूद भी लोग जिम्मेदारों की बात मानने को तैयार ही नहीं है और जमीन में बने गड्ढों में भरे गंदे पानी को लगातार पी रहे हैं।

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