
गुना. डिप्रेशन में आए बच्चों की समस्या दूर करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है, ताकि बच्चे किसी प्रकार का गलत कदम नहीं उठाएं। इसके लिए एक टोल फ्री नंबर जारी किया गया है, इस नंबर पर कॉल करने पर स्टूडेंट्स की काउंसलिंग की जाएगी, कांउसलिंग के दौरान जो समस्या स्टूडेंट्स में नजर आएगी, उसको दूर की जाएगी। इसके लिए चाहे पैरेंट्स से बता करना पड़े या फिर टीचर्स से, बच्चे का भी माइंडवॉश किया जाएगा। ताकि वह किसी भी परिस्थति में खुद को कमजोर समझते हुए कोई गलत फैसला नहीं ले ले।
टोल फ्री 14425 सेवा पूर्ण रूप से निशुल्क है। इस पर सुबह 8 रात 8 बजे तक फोन किया जा सकता है। रविवार अथवा अन्य अवकाश पर सुबह 10 से शाम 5 बजे तक परामर्श दाता उपलब्ध रहते हैं जो किशोर-किशोरियों से हुई चर्चा गोपनीय रखते हैं और सहयोग भी करते हैं।
सरकार ने बच्चों की सहायता के लिए अच्छी पहल की है। शिक्षा विभाग-समग्र शिक्षा ने यूएनएफपीए- एमपी एवं सीआईएनआई संस्था कोलकाता के तकनीकी सहयोग से तनावग्रस्त 10 से 19 वर्ष तक के बच्चों एवं किशोरों की सहायता के लिए टेली काउंसलिंग सुविधा-उमंग किशोर हेल्प लाइन प्रदान की है। बता दें कि यह सेवा 2020 से चालू है लेकिन प्रचार-के अभाव में इसकी जानकारी न तो उन्हें है जिनके लिए यह योजना बनाई गई है। जानकारी के मुताबिक बच्चे एवं किशोर टोल फ्री नम्बर 14425 पर अपनी परेशानी बता सकते हैं। यही नहीं अभिभावक व शिक्षक भी बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर बात कर सकते हैं। इस टोल फ्री नम्बर पर होने वाली चर्चा को पूर्ण रूप से गोपनीय रखा जाता है।
ज्ञात हो कि मप्र में 10 साल से लेकर 19 वर्ष तक के स्कूली व कालेज के विद्यार्थियों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने के कई मामले सामने आए हैं। जिनकी विवेचना से यह तथ्य सामने आया कि बच्चे तनाव ग्रस्त थे। यदि उन्हें समय पर मार्गदर्शन मिल जाता तो घटनाएं घटने बच सकती थीं। इन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने उमंग किशोर हेल्प लाइन शुरू की है। उमंग हेल्प लाइन पर अब तक दो लाख से भी ज्यादा बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं ।
कौन कर सकता है हेल्प लाइन में फोन
टोल फ्री नम्बर 14425 पर ऐसे 10 से 19 वर्ष तक के बच्चे फोन कर सकते हैं जो अपने मन की बात किसी से साझा करने परेशानी महसूस कर रहे है। जिनके मन में स्वयं को नुकसान पहुंचाने के विचार आ रहे हों, नशे की लत अथवा सोशल मीडिया की लत लग गई हो, किसी भी हिंसा का शिकार हो, किसी परिजन या बाहरी व्यक्ति द्वारा यौन शोषण हो रहा हो, पढाई या कॅरियर से संबंधित तनाव हो रहा हो।
उमंग हेल्प लाइन को अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम से जोड़ा गया है। जो स्कूल शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से संचालित हो रहा है। किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक स्कूल में दो शिक्षक को एम्बेसडर बनाया है। यह शिक्षक बच्चों को उनस्रद्ध व्यक्तिगत समस्याओं पर परामर्श देने का कार्य करकें।
-सत्येंद्र शर्मा, सीपीएचसी सलाहकार
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Published on:
05 Jul 2023 05:03 pm
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