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पत्रिका बिग इश्यू : शहर से निकली जीवनदायिनी गुनिया नदी को बना दिया गंदा नाला, घरों से निकले सीवेज पाइप मिला दिए नदी में

क्या गुना शहर ऐसे ही बनेगी मिनी स्मार्ट सिटी- दोनों तरफ बेतहाशा अतिक्रमण से संकरी हुई गुनिया- प्रशासनिक उदासीनता और जनता की लापरवाही की वजह से बारिश के दौरान उठाना पड़ा था बहुत ज्यादा नुकसान- नदी संरक्षण के लिए प्रशासनिक और सामाजिक प्रयास नाकाफीड्रेनेज सिस्टम, अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था में भी कोई सुधार नहीं

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पत्रिका बिग इश्यू : - शहर से निकली जीवनदायिनी गुनिया नदी को बना दिया गंदा नाला,  घरों से निकले सीवेज पाइप मिला दिए नदी में

पत्रिका बिग इश्यू : - शहर से निकली जीवनदायिनी गुनिया नदी को बना दिया गंदा नाला, घरों से निकले सीवेज पाइप मिला दिए नदी में

गुना. सरकार ने गुना शहर को मिनी स्मार्ट सिटी बनाने की विधिवत घोषणा तो काफी समय पहले ही कर दी है। यही नहीं शहर को हर क्षेत्र में विकसित करने के लिए करोड़ों रुपए की कई अति महत्वाकांक्षी योजनाओं के जरिए प्रशासन को बजट उपलब्ध कराया। लेकिन अधिकारियों के उदासीन रवैए के कारण आज तक मिनी स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हंै। सभी योजनाएं व विकाय कार्य अधूरे पड़े हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत यह है कि पांच साल बाद भी शहरवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, लेकिन अधिकारी हर साल बैठकें कर वहीं पुराने निर्देशों को दोहराने में जुटे हुए हैं। यह स्थिति देख शहरवासियों के बीच चर्चा सुनी जा रही है कि क्या ऐसे ही गुना शहर मिनी स्मार्ट सिटी बनेगा।
जानकारी के मुताबिक गुना शहर को वर्ष 2015 में मिनी स्मार्ट सिटी बनाने के लिए मप्र के चुनिंदा 12 शहरों में शामिल किया गया था। लेकिन पांच साल बाद भी शहर के हालातों में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इन पांच सालों में मिनी स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सबसे जरूरी ड्रेनेज सिस्टम तक नहीं सुधारा जा सका है। आज भी शहर के प्रत्येक वार्ड में जल निकासी न होने से घरों का गंदा पानी घरों के आसपास ही फैल कर जमा हो रहा है। वर्तमान में यह शहर की सबसे जटिल समस्या बन चुकी है। अतिक्रमण व यातायात के मामले में भी कोई सुधार नहीं आ सका है। शहर के एबी रोड सहित मुख्य मार्गों व बाजार से अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है।
पार्किंग के अभाव में यातायात व्यवस्था जस की तस है। बिजली वितरण समस्या हाइटेक होने की वजाए सामान्य दर्जे की है। आज भी अधिकांश उपभोक्ता आकलित खपत के बिलों का दंश झेलने को विवश हैं। बिजली वितरण नियमित नहीं है, कभी भी लाइट गुल हो जाती है। शहर के जीवनदायिनी दो प्रमुख प्रोजेक्ट, पेयजल पाइप लाइन विस्तार कार्यक्रम व सीवर लाइन परियोजना आज भी अधूरे हैं। वहीं अमृत सिटी योजना के तहत चलने वाली सूत्र सेवा बसें भी अभी तक पूरी चालू नहीं हो पाई हैं।
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लगातार अनदेखी से नदी बनी गई गंदा नाला
शहर के बीच से गुजरी जीवनदायिनी गुनिया नदी का फिर से जीर्णोद्धार करने इसे मिनी स्मार्ट सिटी में शामिल काफी समय पहले ही शामिल कर लिया गया है। जिसके बाद नदी का सर्वे भी हो चुका है। डीपीआर तैयार कर प्रोजेक्ट पर काम करने की बात कही गई। लेकिन धरातल पर आज तक ठीक से काम नहीं हो सका है। यही वजह है कि आज भी गुनिया नदी में घरों से निकले सीवर को बहाया जा रहा है। घरों से निकला सभी तरह का कचरा भी इसी में डाला जा रहा है। वर्तमान में इसकी हालत देख कोई यह नहीं कह सकता है कि जीवनदायिनी नदी है। बल्कि देखने पर गंदे नाले की तरह नजर आती है।
यहां बता दें कि गुनिया नदी सिंगवासा तालाब से होते हुए मातापुरा, गुलाबगंज, बांसखेड़ी, घोसीपुरा, हनुमान कॉलोनी, बड़ा पुल, रपटा होते हुए पिपरौदा गांव से होकर मकरावदा डैम में जाकर मिलती है, लेकिन उचित रखरखाव न होने और अनदेखी से नदी का अस्तित्व खतरे में आ गया है। क्योंकि बेतहाशा अतिक्रमण और कचरा फेंकने के चलते नदी धीरे-धीरे नाले में बदल गई है। पिछले कुछ सालों में नदी की सुध शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ली थी। इसके बाद जिला व नपा प्रशासन ने सफाई की औपचारिकता भी निभाई। गुनिया नदी बचाओ अभियान समिति मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में लेकर गई। सुनवाई के बाद एनजीटी ने प्रशासन को नदी के जीर्णोद्धार के आदेश दिए थे। इसकी समय सीमा गुजरने के बाद समिति ने एक बार फिर जिला प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराया। तत्कालीन कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने गुनिया नदी का निरीक्षण कर सीएमओ को निर्देश दिए थे कि गुनिया नदी को मिनी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया जाए। जिसके तहत नगरीय क्षेत्र की नदी को साफ करने पुर्नजीवन योजना में काम किया जाएगा।
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नपा ने यह किए प्रयास
गुनिया नदी को पुर्न जीवित करने के लिए नपा ने सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर सफाई अभियान चलाया। यही नहीं नदी के दोनों ओर अतिक्रमण हटाने मकानों पर सफेद लाइनिंग भी की। नदी में कचरा डालने से रोकने पुल, पुलियाओं पर जाली व हरी मेट लगाई गई। कई जगह तार फेंसिंग भी करवाई गई। जेसीबी से गंदगी साफ की गई। इतना सब कुछ करने के बाद अच्छे परिणाम भी नजर आए। यह सभी कवायद तीन साल पहले ही की गई थी। इसके बाद लगातार अनदेखी के चलते फिर से जस के तस हालात निर्मित हो गए हैं। यही कारण रहा कि इस साल बारिश के मौसम में गुनिया नदी का रौद्र रूप देखने को मिला था। नदी के दोनों ओर बने मकानों में रहने वाले लोगों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी अब तक न तो जनता ने सबक लिया और न ही प्रशासन ने।
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