
गुना. गोपालपुरा तालाब का गहरीकरण करने सोमवार को विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने श्रमदान किया। युवाओं ने गैंती फावड़े चलाए और तालाब से मिट्टी निकाली। पत्रिका अमृतम् जलमं अभियान के तहत इस साल गोपालपुरा तालाब को गहरा करने बीड़ा उठाया है। जहां युवाओं ने मेहनत से तालाब की खुदाई की और मिट्टी को ट्राली में भरकर तालाब के बाहर निकाला।
अभियान के दूसरे दिन गहरीकरण कार्य समाजसेवी ओएन शर्मा ने शुरू कराया। उधर, नगर पालिका परिषद द्वारा जेसीबी मशीन लगाकर तालाब की मिट्टी बाहर निकाली जा रही है। तालाब की मिट्टी बाहर निकालकर एकत्रित किया जा रहा है, इस मिट्टी को शहर के पार्कों में डालकर उनको विकसित किया जाएगा।
श्रमदान 17 को
श्रमदान की श्रृंखला में 17 मई को सामाजिक कार्यकर्ता, धार्मिक और समाज शामिल होंगे।
पूरी तरह सूख चुका है तालाब
गोपालपुरा तालाब पूरी तरह सूख चुका है। तालाब के सूखने से असंख्य मछली और जीव जंतुओं का जीवन समाप्त हो गया है। इन दिनों जानवर पानी की तलाश में तालाब पर आते हैं, लेकिन पानी न होने से प्यासे ही लौट जाते हैं। एक हफ्ते से यहां हिरण और दूसरे जानवर नजर ही नहीं आए। लोगों ने बताया, तालाब निर्माण के बाद संभवत: पहली बार तालाब सूखा है। पूरी तालाब में जगह -जगह दरार आ चुकी हैं।
तालाब में आ चुकी है काली मिट्टी
तालाब में वर्षों से काली मिट्टी एकत्रित हो रही है और इससे तालाब में पानी की भराव क्षमता कम हो गई है। औढिय़ा नदी पर बने इस तालाब में नाम मात्र भी पानी नहीं है और वर्षों पुरानी बेसकीमती मिट्टी निकल आई है। विशेषज्ञों की माने तो यह मिट््टी खाद का काम कर सकती है। किसान अगर इस मिट्टी को अपने खेत में बिछा दें तो खेत सोना उगल सकते हैं। कई लोग अपने घरों के लिए मिट्टी ला रहे हैं।
पत्रिका ने गहरीकरण का जो अभियान चलाया है, वह प्रसंसनीय है। युवाओं को भी आगे आना चाहिए। आज हमने श्रमदान किया, बहुत अच्छा लगा। जल बचाने हमें प्रयास करना होगा। जल है तो कल है।
-प्रमोद भार्गव, नेता विहिप
पत्रिका ने अमृतमं जलम अभियान चलाया है। पानी को हमें, पूरे शहर को आवश्यकता है, अगर तालाब को संरक्षित कर दिया जाए तो भराव क्षमता बढ़ेगी, लोगां को पीने पानी उपलब्ध होगा। हम पत्रिका के साथ हैं।
-सुरेश शर्मा, नेता विहिप
पत्रिका अमृतम् जलमं अनुकरणीय और समाज को दिशा देने वाला कार्यक्रम है। हमारे शहर के पास जो स्तोंत्र हैं, अगर हमें इन्हें संरक्षित करते हैं तो निश्चित रूप से पानी के संकट से निजात दिला सकते हैं।
-ओएन शर्मा, समाजसेवी
Published on:
15 May 2018 10:10 am
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