
ये है हमारा मॉडल रेलवे स्टेशन, दिव्यांगों के लिए रैंप तक नहीं
गुना. यह जानकर हर व्यक्ति को आश्चर्य होगा कि गुना के रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा प्राप्त है। इस स्टेशन को यह उपलब्धि उस समय मिली थी, जब देशभर के साथ-साथ गुना जिले में भी कोरोना का प्रकोप था। लगभग सभी यात्री ट्रेनें बंद थी। यानी कि स्टेशन यात्री विहीन था। ऐसे समय में कौनसे मानकों पर यह स्टेशन खरा उतरा और उसे मॉडल स्टेशन का तमगा दे दिया गया।
हालांकि स्टेशन पर यात्रियों से जुड़ी सुविधाओं की बात करें तो इस मामले में यह स्टेशन काफी पीछे है। गुना जिलेवासी से लेकर बाहर के यात्रियों को इस बात पर भरोसा नहीं होता कि गुना का यह स्टेशन मॉडल दर्जे का है।
यहां बता दें कि शासन की जो गाइड लाइन है उसके मुताबिक हर सरकारी विभाग के कार्यालय, सार्वजनिक स्थान जैसे रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर रैंप का होना अनिवार्य है। लेकिन गुना रेलवे स्टेशन पर यह सुविधा दशकों बाद भी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
रैंप की अनिवार्यत:
दिव्यांगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की गई है, लेकिन रेलवे स्टेशन पर यह रैंप सभी तरह के यात्रियों के काम आता है। यात्री लगेज के साथ एक प्लेट फार्म से दूसरे पर आसानी से आ जा सकते हैं। हजारों यात्रियों की इस समस्या को पत्रिका ने कई बार प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद रेल प्रशासन ने स्टेशन को करोड़ो रुपए का बजट उपलब्ध कराया। इसके बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द ही रैंप का निर्माण होगा, लेकिन स्टेशन से जुड़े कतिपय लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के चलते रैंप का निर्माण न कराते हुए लिफ्ट का काम शुरू कर दिया। जो बीते तीन सालों से जारी है और अभी तक पूरा नहीं हो सका है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि दो प्लेटफार्म को जोडऩे वाली लिफ्ट पर करोड़ों रुपए का बजट खर्च होने के बाद भी मूल जो समस्या थी वह पूरी नही हो रही है।
इस तरह करोड़ों का बजट ठिकाने लगाए जा रहा
हर तीन साल में रेल महाप्रबंधक का गुना स्टेशन पर निरीक्षण होता है। इसमें यात्रियों की आवश्यक सुविधाओं को लेकर करोड़ों रुपए का बजट रेल प्रशासन को मुहैया कराया जाता है, लेकिन फिर भी यात्रियों को वह सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। स्टेशन पर पुराने गड्ढे मिटटी या अन्य पदार्थों से भर कर ऊपर से रंग रोगन करवाकर रेल महाप्रबंधक के निरीक्षण समय चमका दिया जाता है। यात्रियों की सुविधा से जुड़ी कुछ वस्तुओं को रख दिया जाता है और उनके जाने के उपरांत वही पुराना अंग्रेजो के जमाने का स्टेशन लगने लगता है।
बस यहां गिनते जाइए परेशानियां
पूछताछ खिड़की:
यहां हर वर्ग हर स्तर का यात्री गाडिय़ों की जानकारी लेने पहुंचता है, लेकिन खिड़की पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की अस्पष्ट भाषा का सामना करना पड़ता है। गुना स्टेशन पर लाखों रुपए की मशीन एनाउंस करने के लिए लगी है, लेकिन नियमित ऑपरेटर न होने से मशीन का भी ठीक तरह से संचालन नही हो पाता। स्थिति यह है कि गाड़ी स्टेशन पर खड़ी रहती है और मशीन से अनाउंस होता है कि गाड़ी पिछला स्टेशन छोड़ चुकी है।
प्लेटफार्म 3 पर बने टिकट खिड़की
श्रीराम कॉलोनी से लगी दर्जनों कालोनियों हैं। जिसमें लाखों लोग निवास करते हैं। वर्तमान में उन्हें स्टेशन आने के लिए शहर के व्यस्तम जय स्तम्भ चौराहा से 2 किमी का चक्कर लगाकर आना पड़ता है। प्लेटफार्म की संख्या बढऩे से उसी ओर टिकट खिड़की भी बन सकती है, जिससे इस ओर के रहवासियों को सुविधा होगी। श्रीराम कालोनी का एरिया प्लेटफार्म 3 से जुडा हुआ है। एक फुटब्रिज का निर्माण होना अति आवश्यक है, जो प्लेटफार्म-1 पर होते हुए बाहर खुले।
गुना स्टेशन पर बोगी नंबर डिस्प्ले न होना
वर्तमान में गाडिय़ों की संख्या बढ़ा दी गई और उनमें लगी बोगियों की संख्या भी। प्लेटफार्म की लम्बाई भी बढ़ गई है, लेकिन लाइट व्यवस्था और टीन शेड वही पुराना ३0-40 फीट लम्बा है। जब गाड़ी के रुकने का समय 2 मिनट हो तब यात्री अपनी बोगी को खोजता रहता है कि मेरी बोगी कहां है।
आवारा मवेशियों का आना
गुना स्टेशन के प्लेटफार्म के अंतिम छोर पर बाउंड्रीवाल न होने से आवारा पशु स्टेशन के अन्दर घुस आते हैं। यात्रियों को जान माल की हानि होती है। कई बार हादसे हो चुके हैं।
गुना में लिफ्ट सिस्टम पूरी तरह से फेल
गुना रेलवे स्टेशन पर तीन प्लेट फार्म हैं। ऐसे में यात्रियों को ट्रेन में सवार होने दूसरे और तीसरे प्लेट फार्म पर जाना पड़ता है। सामान्य यात्रियों को फुट ओवर ब्रिज की सैकड़ों सीढिय़ां चढ़कर जाना पड़ता है, लेकिन दिव्यांग यात्री कैसे जा पाएगा यह बड़ा सवाल है। वर्तमान में प्लेटफार्म-एक पर लिफ्ट का काम पूरा हो चुका है। जबकि दूसरे प्लेट फार्म पर काम जारी है। रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों यात्रियों को कम समय में ही एक प्लेटफार्म से दूसरे व तीसरे पर जाकर ट्रेन में बैठना होता है। यह कार्य लिफ्ट के लिए जरिए संभव नहीं है। इधर लिफ्ट के ठीक से संचालन के लिए प्रबंधन के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। जो कर्मचारी उपलब्ध है वह सुबह 7 से शाम 4.३0 बजे तक ही ड्यूटी कर सकता है। लिफ्ट का समय-समय पर मेंटनेंस जरूरी है।
इसलिए स्टेशन का विस्तार जरूरी
गुना स्टेशन पर वही सदियों पुराने तीन प्लेटफार्म हैं। उस समय गाडिय़ों की संख्या, यात्रियों की बहुत कम थी यानी 24 घन्टे में 2 से 3 सवारी गाडियां पास होती थी, तब यात्रियों को इतनी परेशानी नही होती थी, परन्तु आज वर्तमान में 24 घन्टे में लगभग 63, 64 गाडियां पास होती हैं, लेकिन प्लेटफार्म 3 ही हैं।
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इस सुविधा में हो रहा है इजाफा
रेलवे प्रशासन के मुताबिक जोधपुर भोपाल 148 13 और 148 14 एक्सप्रेस में 19 अप्रेल से एक वातानुकूलित श्रेणी की बोगी और एक शयन श्रेणी की बोगी स्थायी रूप से जुडऩे जा रही है, जिससे यात्रियों को सुविधा होगी। रेल प्रशासन के राजस्व में भी बढोत्तरी होगी। हालांकि कई ट्रेनों की बहाली अब तक नहीं हुई है।
Published on:
17 Apr 2022 01:47 pm
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