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‘जहां विज्ञान फेल हो जाता है वहां अध्यात्म शुरू होता है’

सनातन धर्म संस्कृति को यथावत रखने के लिए देशभर का संत समाज जुटा हुआ है महात्मा गांधी का नाम इसलिए अमर है क्योंकि वे देश के लिए बहुत कुछ कर गए

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‘जहां विज्ञान फेल हो जाता है वहां अध्यात्म शुरू होता है’

‘जहां विज्ञान फेल हो जाता है वहां अध्यात्म शुरू होता है’

राघौगढ़. जिले के राघौगढ़ में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान प्रसिद्ध आचार्य ब्रजबिहारी अनिकेत कृष्ण महाराज ने कहा कि जब बसंत आती है तो प्रकृति बदल जाती है और जब संत पहुंचते है तो संस्कृति सुधर जाती है। यह उदाहरण उन्होंने भारत की धर्म संस्कृति और सनातन धर्म पर देते हुए कहा कि सनातन धर्म संस्कृति को यथावत रखने के लिए देशभर का संत समाज जुटा हुआ है।

अनिकेत कृष्ण ने कहा कि जहां विज्ञान फेल हो जाता है वहां अध्यात्म शुरू होता है और पूरी दुनिया इस बात की खोज मे लगी है कि आखिर यह कैसे हो रहा है ? यह इशारा उन्होंने बागेश्वर धाम धीरेन्द्र शास्त्री पर देते हुए कहा कि यह सब रामलला की कृपा है। उनका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता। राघौगढ़ के आईटीआई प्रांगण में 2 फरवरी से चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान शनिवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड के चलते कथा पांडाल राधे-राधे से गुंज गया। इस दौरान उन्होंने राजा परिक्षित, राजा दक्ष, हिरण्य कश्यप, हिरण्याक्ष, भगवान भेालेनाथ, राजा मनु आदि कथाओं के वर्णन में कहा कि मनुष्य का जीवन बुलबुलों के समान है। इसलिए अहंकार करने वाले अहंकारी को अपने जीवन को एक मिसाल बनकर दिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर गरीबों का सहारा और उनकी मदद करने के लिए ईश्वर ने इस लायक बनाया है तो मदद करो क्योंकि जिंदगी का कोई ठिकाना नहीं क्योंकि मनुष्य जन्म अनमोल है और मरने के बाद लाखों योनियों में अपने कर्मों से भुगतना पडता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का नाम इसलिए अमर है क्योंकि वे देश के लिए बहुत कुछ कर गए। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान आचार्य ब्रजबिहारी अनिकेत ने कहा कि हम धन कमाने के चक्कर में कर्म और परिणामों को भूल रहे हैं और पाप और लूटपाट की दौलत कमाने वालों को परमात्मा भी स्वीकार नही करेंगी और देखते-देखते ऐसी हवा चलेगी कि सबकुछ धरा रह जाएगा। उन्होंने सूर्य उपासना का उदाहरण देते हुए कहा कि सूर्य को अर्क और उपासना से निश्चित सूर्य प्रबल होते हैं। कथा के प्रसंगों के बीच महाराजश्री ने बेटियों को संस्कार देने का उदाहरण देते हुए कहा कि संस्कारों से परिवार और दुनियां चल रही है और अपनी बेटियों को संस्कारवान बनाने की जरूरत है। जो भगवान के करीबी होते हैं उनसे दुख भी दूर भागता है। इस दौरान उन्होंने भगवान भोलेनाथ, सती मैय्या आदि के प्रसंगों का उल्लेख किया। मंच का संचालन आरोन के युवा विकास शर्मा कर रहे हैं। इस दौरान कथा स्थल ठाकुरजी की भक्ति के बीच जय जयकार से गूंज रहा है। जबकि रविवार को कृष्णजन्म महोत्सव की तैयारी के साथ रात्रि में खाटूश्यामजी की भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा।