महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने बनाया कि धर्मगढ़ गांव में 75 परिवार पिछड़ी जाति और बाकी 225 परिवारों में सभी वर्गों के लोग हैं। गांव वालों से ही उनकी जरूरत के सामान की जानकारी लेने के बाद साथ में गए अशोक, उमेद, सतीश, नवीन, निखिल, आशीष, अभिषेक, तरूण, त्रिलोक व अन्य धर्मगढ़ से 40 किलो मीटर दूर बाजार से जीवन यापन का तमाम सामान खरीद के लाए। धर्मदेव ने अपने हाथों से गांव धर्मगढ़ के तीन सौ परिवारों को पांच सौ रूपए नकद, तीस किलो चावल सहित जीवन यापन की सभी चीजें भेट में दी। वहां के ग्रामींण गेंहू या आटा का इस्तेमाल नहीं करते हैं, यह भी सौभाग्य था कि बाजार में एक ही दुकानदार के पास तीन सौ कट्टे चावल के मिल गए थे।