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स्वामी धर्मदेव ने कराया नेपाल के गांव धर्मगढ़ का पुनर्वास

300 परिवारों को भेंट दी जीवन यापन की सभी सामग्री, चीन सीमा से 40 किलोमीटर की दूरी पर है गांव 

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Yuvraj Singh Jadon

Jun 20, 2015

nepal dharmgarh

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गुडग़ांव। सबसे पहले गुजरात भूकंप प्रभावित, बिहार में बाढ़ आपदा, केदारनाथ में जल प्रलय पीडि़त गांवों के पुनर्वास के बाद अब महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव महाराज ने नेपाल के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के गांव धर्मगढ़ में पुनर्वास का काम किया है। जिन हालात में इस दुर्गम पहाड़ी गांव का पुर्नवास कराया गया, वह भी नेपाल सरकार की शर्तों के अनुरूप ही संभव हो सका है। इस गांव का चयन नेपाल के ही स्थानीय युवक सुदीप के प्रयासों से हो सका है।

नेपाल में गांव धर्मगढ़ में पुनर्वास कार्य कराने के बाद लौटे पंचनद स्मारक समिति के अध्यक्ष, शिक्षण संस्थाओं के संचालक और महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने बताया कि नेपाल भुकंप त्रासदी के एक माह बाद ही वहां पर किसी भी संस्था के द्वारा दी जाने वाली मद्द पर सरकारी रोक लगा दी गई। इसके बाद में खट्टर सरकार के सहयोग से इजाजत मिली तो नेपाल सरकार ने बाहर से लाई जाने वाली सामग्री पर एक्साईज डयूटी लागू कर दी। इसके बाद में विकल्प यह बचा कि नेपाल से ही साम्रगी खरीद कर राहत-पुनर्वास के लिए स्थानीय लोगों को दी जा सकती है। इसके पीछे नेपाल सरकार की संभवत सोच वहां के बाजार को गति प्रदान किया जाना था।

एेसे चुना गया दुर्गम गांव धर्मगढ़
महामंडलेश्वर धर्मदेव ने बताया कि इत्तेफाक से जो गांव चुना गया, उसका नाम धर्मगढ़ ही है। यह धर्मगढ़ गांव काठमांडू से 140 किलो मीटर दूर जनकपुर स्टेट,जिला दोरखा, तहसील चरीकोट में दुर्गम पहाड़ी इलाके में चीन सीमा से महज 40 किलो मीटर की दूरी पर है। इससे पहले जिस गांव में पहुंचे वहां नुकसान बहुत कम दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि धर्मगढ़ गांव की पहचान स्थानीय युवक सुदीप और उसके परिजनों ने दो दिन की मेहनत के बाद की जा सकी, जहां भूकंप के बाद किसी भी प्रकार की सहायता नहीं पहुंची। उस वक्त आंखों से आंसू बह निकले जब ग्रामींणों ने बताया कि तीन सौ परिवारों के लिए एक कट्टा चावल ही डेढ़ माह में मिला और अब जंगली घास की रोटी-चटनी बनाकर पेट भर रहे हैं।

प्रति परिवार 500 रुपए नकद व सामग्री
महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने बनाया कि धर्मगढ़ गांव में 75 परिवार पिछड़ी जाति और बाकी 225 परिवारों में सभी वर्गों के लोग हैं। गांव वालों से ही उनकी जरूरत के सामान की जानकारी लेने के बाद साथ में गए अशोक, उमेद, सतीश, नवीन, निखिल, आशीष, अभिषेक, तरूण, त्रिलोक व अन्य धर्मगढ़ से 40 किलो मीटर दूर बाजार से जीवन यापन का तमाम सामान खरीद के लाए। धर्मदेव ने अपने हाथों से गांव धर्मगढ़ के तीन सौ परिवारों को पांच सौ रूपए नकद, तीस किलो चावल सहित जीवन यापन की सभी चीजें भेट में दी। वहां के ग्रामींण गेंहू या आटा का इस्तेमाल नहीं करते हैं, यह भी सौभाग्य था कि बाजार में एक ही दुकानदार के पास तीन सौ कट्टे चावल के मिल गए थे।

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