
जानकारी देते हुए प्रतीक हाजोल
(पत्रिका ब्यूरो,गुवाहाटी): असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी(एनआरसी) के अद्यतन को देख झारखंड सरकार भी एनआरसी तैयार करने की संभावनाओं को तलाशने लगी है। झारखंड से वरिष्ठ अधिकारियों का दल हाल ही में असम के दौरे पर आया। दल ने पता किया कि असम में कैसे एनआरसी तैयार की गई। झारखंड के साथ बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं लगती है। फिर भी पड़ोसी देश से घुसपैठ कर लोग झारखंड में घुस गए हैं। पश्चिम बंगाल से सटे झारखंड के दो जिलों में स्थिति भयावह बताई जाती है। बंगाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा से अवैध तरीके से प्रवेश कर बांग्लादेशी झारखंड और अन्य राज्यों में प्रवेश कर स्थिति को वहां जटिल बना चुके हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत की बांग्लादेश के साथ 4,096किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। पश्चिम बंगाल के साथ सबसे ज्यादा 2,217 किमी सीमा बांग्लादेश की पड़ती है। घुसपैठ से झारखंड के दो जिलों में स्वदेशी लोगों के लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है। इसलिए झारखंड सरकार ने झारखंड में एनआरसी बनाने की संभावनाओं को तलाशना शुरु कर दिया है। झारखंड से आई अधिकारियों की टीम ने राज्य सरकार के अधिकारियों,एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हाजेला,अखिल असम छात्र संघ(आसू) के पदाधिकारियों से मुलाकात की और इस बारे मे जानकारी हासिल की।
सूत्रों के अनुसार झारखंड में तैयार की जानेवाली एनआरसी की मॉडलिटी पूरी तरह से अलग होगी।असम में पहले से 1951 की एनआरसी थी। इसका 24 मार्च 1971 के कट ऑफ के आधार पर नवीनीकरण किया गया है।ऐसा 1985 के असम समझौते के आधार पर किया गया है।वहीं झारखंड में 1951 की एनआरसी नहीं है। इसलिए वहां कट ऑफ अलग होगा। आसू के सलाहकार डा.समुज्जवल भट्टाचार्य ने बताया कि झारखंड के अधिकारी यह जानना चाहते थे कि असम में इसका नवीनीकरण क्यों कराया गया है। इसकी मॉडलिटी क्या है। हमने पूरा वाकया उन्हें समझाया। 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी को दिए गए पहले ज्ञापन से शुरु कर अब तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट की देखरेख से यह संभव हुआ है।
Published on:
20 Aug 2018 02:17 pm
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