
असम में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी (Photo-IANS)
Assam Assembly Elections 2026: असम की 126 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों द्वारा तैयारी तेज कर दी है। नेताओं के बीच चुनावी जंग भी शुरू हो गई। जहां एक तरफ बीजेपी अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस सत्ता पर काबिज होने का प्रयास कर रही है। बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए ‘तीन गोगोई’ एक साथ आए है।
विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने राइजर दल और असम जातीय परिषद (AJP) के साथ गठबंधन किया है। चुनाव से महज दो हफ्ते पहले बने इस गठबंधन से सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
दरअसल, इस बार ऊपरी असम की राजनीति खास चर्चा में है, जहां पर तीनों दलों के नेताओं का सरनाम ‘गोगोई’ है। हालांकि अब सवाल यह है कि क्या यह गठबंधन बीजेपी के मजबूत किले में सेंध लगा पाएगा या नहीं?
ऊपरी असम में 35 विधानसभा सीटें है। 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। कांग्रेस ने महज 5 सीटों पर ही जीत दर्ज की थी। एनडीए ने यहां से 30 सीटें जीती थी। राइजर दल के प्रमुख अखिल गोगोई ने शिवसागर सीट जीतकर अपनी पार्टी की शुरुआत की थी। हालांकि बाद में कांग्रेस के दो विधायक बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे विपक्ष और कमजोर हो गया।
मध्य असम में 41 विधानसभा सीटें है। पिछले चुनाव में यहां से एनडीए ने शानदार जीत दर्ज की थी। एनडीए ने 22 और कांग्रेस गठबंधन ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं तीन सीटें अन्य के खाते में गई।
निचला असम में 50 विधानसभा सीटें है। पिछले चुनाव में एनडीए ने 23 सीटें और कांग्रेस गठबंधन ने 27 सीटें जीती थीं। निचले असम में कांग्रेस का वर्चस्व माना जाता है।
इस बार विपक्ष को उम्मीद है कि ऊपरी असम में वोट बंटवारे से बचकर वे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। 2021 के आंकड़े बताते हैं कि कई सीटों पर राइजर दल और AJP के वोट, बीजेपी की जीत के अंतर से ज्यादा थे। यही वजह है कि इस बार गठबंधन को ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है।
1- गौरव गोगोई- जोरहाट से कांग्रेस के टिकट से मैदान में है। गौरव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे है। वहीं अटकले लगाई जा रही है कि कांग्रेस की तरफ से गौरव गोगोई सीएम फेस भी हो सकते है।
2- अखिल गोगोई (राइजर दल) – शिवसागर से चुनाव लड़ रहे है। इस बार उन पर अपनी सीट बचाने की भी जिम्मेदारी होगी।
3- लुरिंज्योति गोगोई (AJP) – खोवांग से पहली जीत की तलाश में है।
तीनों नेता अहम अहोम समुदाय से आते हैं, जो क्षेत्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाता है।
गांव स्तर पर भी गठबंधन को लेकर उम्मीदें दिख रही हैं। कई लोगों का मानना है कि अगर इस बार वोट नहीं बंटे, तो विपक्ष मजबूत चुनौती दे सकता है। वहीं, पार्टियां आपसी तालमेल के लिए संयुक्त बैठकों और साझा प्रचार पर जोर दे रही हैं।
वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2021 के आंकड़े पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं। उस समय CAA विरोधी लहर थी, जिससे क्षेत्रीय पार्टियों को फायदा मिला। अब हालात बदल चुके हैं, ऐसे में वोट ट्रांसफर होना आसान नहीं होगा। हालांकि इस बार सीएम हिमंत बिस्व सरमा द्वारा मुसलमानों के खिलाफ दिए गए बयान को लेकर विपक्ष को फायदा होने की उम्मीद है।
Published on:
27 Mar 2026 11:36 am
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