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भूपेन हजारिका को मिला भारत रत्न पुरस्कार गायब, रिपोर्ट भी दर्ज

Bhupen Hazarika: संगीतकार, गीतकार डा.भूपेन हजारिका को मरणोपरांत मिला भारत रत्न पुरस्कार कहां है, इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यहां तक की थाने में रिपोर्ट भी दर्ज हो गई है।

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भूपेन हजारिका को मिला भारत रत्न पुरस्कार गायब, रिपोर्ट भी दर्ज

( गुवाहाटी, राजीव कुमार ) । संगीतकार, गीतकार डा.भूपेन हजारिका को मरणोपरांत मिला भारत रत्न पुरस्कार विवादों में घिर गया है। नई दिल्ली में 8 अगस्त को डा.हजारिका ( Dr. Bhupen Hazarika ) के पुत्र तेज हजारिका ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों यह पुरस्कार ग्रहण किया था, लेकिन अब इस पुरस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सबसे बड़ा विवाद तो पुरस्कार किसके पास है, इसे लेकर खड़ा हो गया है। खुद हजारिका के परिवार वालों ने ही ऐसे सवाल खड़े किए हैं। खास बात यह है कि इस मामले में एक टीवी पत्रकार ने पुरस्कार के गायब होने को लेकर दिसपुर थाने में मामला भी दर्ज कराया है।

पुरस्कार है कहां ?

पुरस्कार कहां है, इसको लेकर डा.हजारिका के परिवारवालों ने ही सवाल खड़े कर दिये हैं। गौरतलब है कि पुरस्कार तेज हजारिका ( Tez Hazarika ) की ओर से ग्रहण किया गया, जो विदेश में रहते हैं। वे पुरस्कार लेने आए थे। उन्होंने पुरस्कार ग्रहण किया और वापस विदेश चले गए। डा.हजारिका के परिवार और राज्य सरकार का कहना है कि भूपेन हजारिका ( Bhupen Hazarika ) ने अपनी वसीयत में यह स्पष्ट लिखा था कि उनका सारा सामान सरकार की देख-रेख में गुवाहाटी के श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में स्थित भूपेन हजारिका संग्राहलय ( Bhupen hazarika museum ) में रखा जाएगा, लेकिन भारत रत्न पुरस्कार को वहां नहीं रखा गया है। संभवतः तेज हजारिका इसे अपने साथ ले गए हैं।

मुख्यमंत्री छह घंटे करते रहे इंतजार

राज्य के सांस्कृतिक मंत्री नव कुमार दलै का कहना है कि नई दिल्ली में पुरस्कार ग्रहण कर गुवाहाटी लौटने के बाद तेज हजारिका ने अपने परिवार के सदस्य के जरिए मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ( Sarbanand Sonowal ) से मिलने का समय मांगा था। मुख्यमंत्री ने मिलने का समय भी दिया था। मुख्यमंत्री तेज हजारिका के लिए छह घंटे इंतजार करते रह गए, लेकिन वे नहीं आए। दलै ने कहा कि भूपेन हजारिका असम के लोगों के दिल में बसते हैं। उनकी वसीयत के अनुसार भारत रत्न पुरस्कार को असम सरकार को सौंप देना चाहिए था।

हजारिका परिवार में दो-फाड़

हजारिका परिवार में भी दो फाड़ है। एक गुट ने भूपेन हजारिका ट्रस्ट बना रखा है, तो तेज हजारिका गुट ने भूपेन हजारिका फाउंडेशन ( Bhupen Hazarika) बना रखा है। डा. भूपेन हजारिका की मौत के बाद ही तेज अपने पिता के कामों पर अपना हक जताने लगे थे, लेकिन कल्पना लाजिमी के रहते हुए वे पिता से कटे रहे। फाउंडेशन के सचिव दीपांकर हजारिका का कहना है कि पुरस्कार सुरक्षित जगह पर है। तेज हजारिका खुद आकर इसे सुरक्षित हाथों में सौंपेंगे, लेकिन जब तक यह श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र के भूपेन हजारिका संग्रहालय में रख नहीं दिया जाता, तब तक इस पर विवाद चलता रहेगा।

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