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(पत्रिका ब्यूरो,गुवाहाटी): राष्ट्रीय नागरिक पंजीयन (एनआरसी) में जिनका नाम नहीं होगा, उन्हें असम के विदेशी न्यायाधिकरणों में अपील करनी होगी। केंद्र ने विदेशी न्यायाधिकरण आदेश 1964 के नियमों में संशोधन करने का फैसला किया है।
यह है नियम
फिलहाल इसमें जो नियम हैं, उसके अनुसार असम में अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध व्यक्ति के खिलाफ राज्य और पुलिस मामला विदेशी न्यायाधिकरण में सौंपती है। लेकिन संशोधन के बाद एनआरसी में नाम न रहने वाले व्यक्ति को खुद विदेशी न्यायाधिकरण के पास जाना होगा और खुद को भारतीय साबित करना होगा।
इस दिन आएगा एनआरसी का अंतिम प्रारूप
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि 30 जुलाई को एनआरसी का अंतिम प्रारूप आएगा। इसमें जिन लोगों के नाम शिकायत और दावों के बावजूद नहीं रहेंगे, यानि अंतिम सूची में नहीं रहेंगे, उनके बारे में सोचना होगा। इन्हें भी रास्ता दिखाना होगा। इस बदले नियम में ये लोग विदेशी न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटा पाएंगे और उन्हें न्यायाधिकरण में साबित करना होगा कि वे अवैध तरीके से नहीं रह रहे हैं।
3.29 करोड़ लोगों ने किया था आवेदन,इतनों का नाम हुआ शामिल
राज्य में फिलहाल 100 विदेशी न्यायाधीकरण काम कर रहे हैं। 30 जुलाई को एनआरसी के अंतिम प्रारूप के प्रकाशन के बाद ही राज्य में रह रहे भारतीय नागरिक और 25 मार्च 1971 के बाद आए विदेशियों के बीच एक स्पष्ट रेखा खींच जाएगी। पहले प्रारूप में 1.9 करोड़ लोगों के नाम हैं, जबकि एनआरसी में नाम शामिल करवाने के लिए 3.29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था। पहला प्रारूप 31 दिसंबर को आया था।
जिनका नाम नहीं होगा,कहलाएंगे विदेशी
गृह मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार प्रारूप एनआरसी में जिनका नाम नहीं होगा, वे विदेशी घोषित हो जाएंगे। इन्हें एक महीने का समय अपने दावों व शिकायतों के लिए दिया जाएगा। अगस्त व सितंबर तक वे अपने दावों और शिकायतों को विभिन्न संबंधित पक्षों के समक्ष रख पाएंगे। इनकी सही तरीके से सुनवाई होगी। लेकिन इसके बाद मामला विदेशी न्यायाधिकरण के पास ले जाना होगा। राज्य में इससे उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए केेंद्र ने पर्याप्त अर्द्ध सुरक्षा बलों की कंपनियां भेजी है।
Published on:
25 Jul 2018 03:56 pm
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