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असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर, भूस्‍खलन से ट्रेन सेवाएं प्रभावित

असम के डिमा हसाओ में फिर शुक्रवार तड़के हुए भूस्खलन से शेष देश का रेल संपर्क बराकघाटी और त्रिपुरा से बहाल नहीं हो सका है।

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assam flood

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(राजीव कुमार की रिपोर्ट)

गुवाहाटी। असम के डिमा हसाओ में फिर शुक्रवार तड़के हुए भूस्खलन से शेष देश का रेल संपर्क बराकघाटी और त्रिपुरा से बहाल नहीं हो सका है। अब 17 जून तक इस रेल मार्ग के बहाल होने की संभावना नहीं है। पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने बताया कि बांदरखाल और दामचारा के बीच हुए नए भूस्खलन से ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई है। 14 जून को लामडिंग-बदरपुर सेक्शन में छह जगह पर भूस्खलन हुआ था। इन्हें रेलवे ने ठीक किया तो आज फिर हुए भूस्खलन के चलते रेल संपर्क बहाल नहीं हो पाया है। 17 जून के पहले इसके ठीक होने की संभावना नहीं है। भूस्खलन के चलते कई ट्रेनों को रद्द करने के साथ ही कई को नियंत्रित किया गया है।


सात जिले प्रभावित


वहीं बाढ़ से असम के सात जिलों के 370 गांव के 1,66,836 लोग प्रभावित हुए हैं। इन जिलों में होजाई,कछार,गोलाघाट,हैलाकांदी,करीमगंज,कार्बी आंग्लांग (पूर्व) और पश्चिम कार्बी आंग्लांग शामिल हैं। धनसिरी नदी गोलाघाट में,बराक नदी कछार और करीमगंज में,काटाखाल नदी हैलाकांदी में और कुशीयारा नदी करीमगंज में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।एनडीआरएफ ने बाढ़ प्रभावित इलाकों से 422 लोगों को रेस्‍क्‍यू किया है। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 155 शिविर स्थापित किए गए है। इनमें 36 हजार बाढ़ प्रभावित लोग रह रहे हैं।


काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के जीव जंतु प्रभावित


सिलचर में पिछली रात से मूसलाधार बारिश हो रही है। बराक नदी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रही है। बराक का पानी हर दो घंटे में 2 सेमी कर बढ़ रहा है। उधर कार्बी आंग्लांग जिले से उतरे पानी ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के विस्तृत इलाके को डूबो दिया है। ऊंचे स्थान की तलाश में जीव-जंतु बाहर शरण लेने निकल आए हैं। वहीं त्रिपुरा में भी बाढ़ की स्थिति जस की तस बनी हुई है। वायुसेना के विशेष विमान से एनडीआरएफ के दल को उतारा गया है।