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बलात्कार व नृशंस हत्याकांड में दोषी जाकिर को फांसी की सजा

जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीता कर ने हुसैन (19) को हत्या के लिए फांसी की सजा और नाबालिग लड़की से बलात्कार के लिए पोक्सो कानून के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई

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(राजीव कुमार की रिपोर्ट)

गुवाहाटी। असम में नागांव जिले की एक अदालत ने 25 मार्च को जिले के बटद्रवा थानांतर्गत लालूंग गांव में 13 साल की एक किशोरी से बलात्कार और हत्या के मुख्य आरोपी जाकिर हुसैन को शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीता कर ने हुसैन (19) को हत्या के लिए फांसी की सजा और नाबालिग लड़की से बलात्कार के लिए पोक्सो कानून के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

पांच आरोपी बरी


अदालत ने हालांकि बीते चार सितम्बर को उसे दोषी ठहराया था और पांच अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। इस घटना से जुड़े प्रमाण को मिटाने का आरोप जाकिर के पिता अब्दुल रज्जाक,मां जुबेदा खातून के साथ ही मुखलेसुर रहमान,अब्दुल रसीद और फखरुद्दीन पर लगा था।

दो नाबालिगों को सुधार गृह भेजा


जांच टीम का हिस्सा रहे नगांव के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रिपुल दास ने कहा कि दो अन्य नाबालिग आरोपी भी दोषी ठहराए गए थे और उन्हें एक किशोर अदालत ने तीन साल के लिए सुधार गृह भेज दिया। दोनों नाबालिगों को जोरहाट शिशु गृह में रखा गया है। जांच अधिकारी धीरेन कलिता ने 158 पन्नों की चार्जशीट रिकार्ड समय में अदालत में दी जिससे यह फैसला आया।

आठ आरोपियों के खिलाफ था आरोप पत्र


नगांव जिले के बटद्रवा थानातंगर्त लालुंग गांव में 25 मार्च को घर में अकेली कक्षा पांच की छात्रा के बलात्कार के बाद उसे जला दिया गया था। युवक अपराध के बाद मौके से फरार हो गया और लड़की को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसने अगले दिन दम दोड़ दिया। बटद्रवा पुलिस ने थाने में मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने तेजी से जांच करते हुए 27 अप्रैल को आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।

राज्य में हुए व्यापक प्रदर्शन हुए


घटना को लेकर पूरे राज्य में व्यापक प्रदर्शन हुए थे। असम सरकार ने विधानसभा में घोषणा की कि वह सदन के अगले सत्र में बलात्कार रोधी एक कड़ा कानून ले आएगी। सरकार ने यह भी घोषणा की कि एक विशेष अभियान के जरिये महिला उप निरीक्षकों की भर्ती की जाएगी ताकि पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 30 प्रतिशत हो।

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