इंदौर को तीसरे टेस्ट की मेजबानी दी गई है। तीसरा टेस्ट 8 से 12 अक्टूबर तक होना है। इस बीच 11 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। इसे देखते हुए क्रिकेट एसो. ऑफ बंगाल ने इस शेड्यूल को बदलने की मांग की थी। पहले कोलकाता को तीसरे टेस्ट की मेजबानी दी गई थी।
किसी भी मैच को जीतने के लिए खिलाडिय़ों को नियम का पता होना बहुत जरूरी होता है। ऐसा न होने पर कोई भी टीम जीतते-जीतते भी मैच हार सकती है। क्या आपको पता है कि इससे पहले कानपुर टेस्ट में एक खास नियम के चलते कीवी बैट्समैन टॉल लाथम को आउट नहीं दिया गया था। वहीं टीम इंडिया को भी इस नियम के बारे में पता नहीं था।
नियमों के बारे में पूरी जानकारी के लिए हम आपको यहां क्रिकेट के कुछ ऐसे ही रूल्स के बारे में बता रहा है, जिनके बारे में क्रिकेट फैन्स कम जानते होंगे।
ये नियम देते हैं बैटिंग करने वाली टीम को फायदा
1. ऐसे नहीं होता ऑउट: यदि कैच पकड़ते समय बॉल फील्डर के किसी भी प्रोटेक्टिव चीज जैसे हेल्मेट, एल्बो गार्ड या पैड से टकरा जाती है, तो बैट्समैन ऑउट नहीं होगा।
2. बाहर गए तो मिलेंगे 5 रन: यदि चोट आने या किसी भी कारण से कोई प्लेयर अंपायर से बिना परमिशन के बीच फील्ड से बाहर जाता है, तो बैटिंग टीम को 5 एक्स्ट्रा रन मिलते हैं।
3. हेल्मेट से रन: बैट्समैन के शॅाट मारने के बाद यदि बॉल विकेट कीपर के पीछे रखी हेल्मेट पर लग जाती है, तो बैटिंग टीम को 5 रन एक्स्ट्रा मिलते हैं।
4. लास्ट गेंद: यदि मैच के दौरान बॉल खो जाए तो फिल्डिंग टीम लास्ट बॉल की अपील कर सकती है। ऐसे में बॉल को डेड माना जाएगा और दूसरी बॉल ली जाएगी। वहीं इस दौरान बैट्समैन ने जितने रन लिए होंगे वो उसे मिलेंगे।
5. नो अपील-नो आउट: यदि फील्डिंग टीम आउट की अपील जैसे एलबीडब्ल्यू या कैच में नहीं करती है, तो अंपायर बैट्समैन को आउट होने पर भी आउट नहीं दे सकते।
ये नियम देते हैं बालिंग वाली टीम को फायदा
1. रिटायर्ड ऑउट: यदि बैट्समैन अंपायर की बिना आज्ञा के रिटायर होता है, तो उसे रिटायर्ड ऑडट माना जाता है।
2. टाइम आउट : यदि विकेट गिरने के 3 मिनट तक दूसरा बैट्समैन क्रीज पर नहीं पहुंचता है तो उसे फील्डिंग टीम की अपील पर टाइम आउट दिया जा सकता है।
3. हैंडलिंग द बॉल: जब कोई बैट्समैन आउट होने से बचने के लिए जानबूझकर बॉल को हाथ लगाकर विकेट से दूर करता है, तो वह हैंडलिंग द बॉल रूल के तहत आउट माना जाता है।
4.स्पाइडर कैम व बॉल का कनेक्शन: यदि बैट्समैन के शॉट मारने के बाद बॉल स्पाइडर कैम से टकराती है, तो उसे डेड बॉल माना जाता है। इस पर बैट्समैन को रन नहीं मिलता।
5. बैटिंग-बॉलिंग आउट टाइम तक नहीं: कोई प्लेयर चोट के कारण जितनी देर तक फील्ड से बाहर रहता है, तो वह लौटने पर उतने समय तक बॉलिंग या बैटिंग नहीं कर सकता।