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चिटफंड कंपनियों से रुपया वापस लेने 11 हजार ने किए आवेदन, अब इन्हें प्रशासन के फैसले का इंतजार

चुनाव आचार संहिता के पहले जमा कराए गए थे आवेदन, आचार संहिता लगते ही बंद कर दिया था काम चिटफंड के निवेशकों का भी आना हुआ शुरू

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चिटफंड कंपनियों से रुपया वापस लेने 11 हजार ने किए आवेदन, अब इन्हें प्रशासन के फैसले का इंतजार

चिटफंड कंपनियों से रुपया वापस लेने 11 हजार ने किए आवेदन, अब इन्हें प्रशासन के फैसले का इंतजार

चिटफंड कंपनियों में निवेश करने वाले 11 हजार निवेशकों ने अपने आवेदन कलेक्ट्रेट में जमा कर दिए हैं। इन आवेदनों की नंबरिंग का भी कार्य हो चुका है, लेकिन निवेशकों को रुपया कैसे लौटाया जाएगा। इसका तय नहीं हो सका है। आचार संहिता खत्म होने के बाद आवेदन जमा कर चुके निवेशकों ने अपर कलेक्टर कार्यालय में पहुंचना शुरू कर दिया है, लेकिन रुपए वापसी के सवाल पर जवाब नहीं मिल रहा है। निवेशकों को निराशा मिल रही है। लोगों ने चिटफंड कंपनियों में अपने बच्चे की पढाई, बेटी की शादी के लिए निवेश किया था। रुपया नहीं मिलने से इनका सपना टूट रहा है।

जिला प्रशासन ने 2011 से 2012 के बीच चिटफंड कंपनियों पर कार्रवाई की थी। इन कंपनियों ने ग्वालियर-अंचल सहित मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश सहित दक्षिण भारत में कारोबार किया। निवेशक चिटफंड कंपनियों के एजेटों के पास अपने रुपए वापस लेने के लिए घूम रहे थे, लेकिन एजेंटों ने हाथ खड़ कर दिए, क्योंकि कंपनियों के दफ्तर बंद हो गए। कंपनी के संचालकों का भी नहीं पता चला। रुपया वापसी के लिए निवेशकों ने कलेक्ट्रेट में चक्कर काटना शुरू कर दिया। संगठित होकर अधिकारियों से भी मुलाकात की। जनसुनवाई में आवेदन दिए गए। इनकी परेशानी को देखते हुए निवेशको से आवेदन लिए गए। आचार संहिता लगने के पहले तक निवेशकों ने अपने आवेदन जमा किया। आचार संहिता लगने के चिटफंड के निवेशकों क आवेदन लेना बंद हो गया। जब आचार संहिता हट गई तो रुपए वापस की उम्मीद करने लगे हैं।

परिवार डेयरी के निवेशक पहुंच रहे जिला कोर्ट

- परिवार डेयरी के निवेशकों को रुपया लौटाने के लिए जिला कोर्ट में कोर्ट कमिश्नर बैठते हैं, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने परिवार डेयरी के खातों पर रोक लगा दी, जिसकी वजह से रुपया वापस नहीं मिल पा रहा है।

- जो लोग रुपया वापसी के लिए अपनी पॉलिसी के साथ कोर्ट कमिश्नर के यहां आवेदन कर चुके हैं। वह अपना रुपया वापसी के लिए आ रहे हैं, लेकिन उन्हें यहां से निराशा मिल रही है।

- 33 कंपनियों के निवेशकों ने आवेदन किए हैं, जिन्हें अपने रुपए वापसी की इंतजार है।

- केएमजे व परिवार डेयरी, सक्षम डेयरी ने शहर में बड़ा कारोबार किया था। इनकी संपत्तियों को प्रशासन कुर्क कर चुका है। केएमजे की 63 संपत्तियां नीलाम की जा रही थी, लेकिन दूसरे राज्यों के निवेशकों ने नीलामी को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद नीलामी पर रोक लग गई।

किराये के मकानों में संचालित थी चिटफंड कंपनियां

- चिटफंड कंपनियों ने किराए का मकान लेकर शहर में ऑफिस खोले थे। किराए के मकानों से ये संचालित हुईं। उन्होंने अपने एजेंट शहर में छोड़ दिए थे, जिन्हें अपने समाज, रिश्तेदार, दोस्त सहित अन्य को झांसे में लिया।

- 50 से अधिक कंपनियों ने ग्वालियर में अपने आफिस खोले थे, लेकिन अधिकतर कंपनियां किराये मकान में संचालित थी। जब इनके ऊपर कार्रवाई की गई, तब खातों में भी रुपये नहीं थे।

- चिटफंड कंपनियों के आवेदन जमा हो चुके हैं, लेकिन शासन स्तर से कोई फैसला आएगा, उसके बाद तय हो सकेगा कि आवेदन पर आगे की कार्रवाई क्या करना है। चिटफंड के मामले कोर्ट में भी चल रहे हैं।

टीएन सिंह, अपर कलेक्टर ग्वालियर