
फायर ब्रिगेड में 140 कर्मी; 75 फीसदी के पास प्रशिक्षण नहीं
ग्वालियर. आगजनी जैसी आपदा में जान-माल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली ग्वालियर की फायर ब्रिगेड खुद ही विपत्ति में है। इसके पास 140 कर्मचारियों की टीम है, लेकिन इनमें से केवल 110 ही आपदा नियंत्रण में तैनात हैं। हैरानी की बात यह है कि फील्ड में तैनात इन फायरकर्मियों में से 75 फीसदी अप्रशिक्षित हैं और बाकी प्रशिक्षित फायरमैन हैं उनमें से अधिकांश की उम्र 50 पार कर चुकी है।
ग्वालियर की जनसंख्या और क्षेत्रफल बढ़ता गया, लेकिन उस हिसाब से फायर ब्रिगेड की गाडिय़ा और सब स्टेशन का विस्तार नहीं हो पाया। अभी नगर निगम स्टेडियम में इसका हैड ऑफिस है। इसके अलावा महाराजबाड़ा, आनंद नगर, दीनदयाल नगर और अल्पना टॉकीज के पास सब स्टेशन हैं। जहां एक गाड़ी मौजूद रहती है। लेकिन यहां लीडिंग ऑफिसर कोई नहीं होता।
नागपुर फायर सर्विस कॉलेज में होती है ट्रैनिंग
नागपुर मे नेशनल फायर सर्विस कॉलेज है जहां पूरी ट्रेनिग दी जाती है। जिसमें स्टेशन फायर ऑफिसर, सब फायर ऑफिसर, डिवीजल फायर अधिकारी की छह-छह महीने की ट्रेनिग होती है। उस ट्रैंड व्यक्ति को मालूम रहता है कि आगजनी के हालात में क्या कदम उठाने चाहिए। लेकिन यहां तो न के बराबर ही ट्रैनिग किए हुए लोग है। सिर्फ असिस्टेंड फायर ऑफिसर उमंग प्रधान ही प्रशिक्षित हैं।
सिर्फ 18 वाहनों का बेड़ा उनमें भी कई हैं खराब
फायर ब्रिगेड के पास वर्तमान में 18 वाहन है। जिसमें बाइक और शव वाहिका भी शामिल है। इनमें से करीब पांच-छह वाहन खराब है। अगर एक साथ चार जगह आगजनी हो जाए तो फायर अमले का मुश्किले पड़ जाए। कई वाहन तो कंडम हो चुके है। सूत्रों की मानें तो रख रखाव का ध्यान नहीं दिया जाता। जबकि नियम है कि ड्यूटी चेंज होने पर चैक होना चाहिए कि वाहन मे क्या-क्या कमी है। साथ ही यह भी चैक होना चाहिए कि जो गाड़ी खड़ी है उनमें पानी मौजूद है या नहीं।
सभी को ट्रेनिंग दी जाती है
फायर ब्रिगेड के कर्मचारी अगर कोई अप्रशिक्षित हैं तो उन्हें ट्रेंड किया जाएगा। वैसे समय समय पर सभी को ट्रेनिंग दी जाती है।
संदीप माकिन, निगमायुक्त
Published on:
20 May 2020 06:32 pm
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