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150 तालाबों से मिलेगा भूजल को अमृत, 393 पुष्कर तालाब भी बनकर तैयार

-मनरेगा और प्रदेश सरकार की योजना से जुलाई तक काम पूरा करने का लक्ष्य-बारिश में इन तालाबों को भरकर मार्च तक पानी रोकने की प्लानिंग-1500 हैक्टेयर भूमि को मिलेगा सिंचाई का लघु माध्यम

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150 तालाबों से मिलेगा भूजल को अमृत, 393 पुष्कर तालाब भी बनकर तैयार

150 तालाबों से मिलेगा भूजल को अमृत, 393 पुष्कर तालाब भी बनकर तैयार

श्योपुर। जल संरक्षण के लिए जिले में बन रहे 150 अमृत सरोवर में से अभी तक16 का काम पूरा हो गया है। इस वर्ष जुलाई तक सभी तालाबों का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन पर करीब 8 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके अलावा पुष्कर सरोवर के नाम से भी 520 तालाब बनाने का लक्ष्य रखा गया है, इनमें से 393 तालाब बनकर तैयार हो चुके हैं। इन तालाबों के जरिये पथरीले क्षेत्र में भूजल स्तर को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा बारिश में तालाबों के भर जाने के बाद आठ से दस महीने पानी को उपयोग के साथ ही संरक्षित करने की भी प्लानिंग तैयार की गई है। इन तालाबोंं के माध्यम से लगभग 1500 हैक्टेयर में सिंचाई के साथ ही स्वयं सहायता समूहों को रोजगार भी दिया जाएगा।


मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिले में 150 अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य दिया है। जिले के तीनों विकासखंड में अधिकांश तालाब किसी की निजी भूमि की बजाय शासकीय ढलवां भूमि पर खोदे जा रहे हैं ताकि पूरे वर्ष पानी जमा रह सके। अमृत और पुष्कर सरोवर तैयार करने के साथ ही जिला स्तर पर रोजगार विकसित करने के लिए मछली पालन, सिंघाड़ा और कमल की खेती को भी शामिल करने की योजना है। इसमें से मछली पालन करके महिला समूह अच्छी खासी आमदनी ले रहे हैं।

अमृत सरोवर
जनपद----------लक्ष्य-------शुरुआत------काम पूरा
विजयपुर नरेगा----55-------15-----7
विजयपुर पीएमकेएसवाय-----15------5------00
कराहल---------55------19------6
श्योपुर---------25-------17------3

पुष्कर सरोवर
जनपद--------लक्ष्य-------शुरुआत------काम पूरा
विजयपुर-------214--------214-----158
कराहल---------140------140------116
श्योपुर---------166-------166------119


वर्सन
-जिले में 150 अमृत सरोवर बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। अभी 16 सरोवर बन चुके हैं। इसके साथ ही पुष्कर सरोवरों का काम भी पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन तालाबों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को प्रेरित करके मछली पालन कराया जा रहा है। जबकि भविष्य में सिंघाड़ा की खेती कराने की योजना भी संभावित है। सभी तालाबों को आजीविका के साधन के रूप में उपयोग करने के लिए स्वयं सहायता समूहों को प्रेरित किया जाएगा।
अतेन्द्र सिंह गुर्जर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी-जिला पंचायत