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देशभर में 375 संस्थाएं बना रहीं खादी के कपड़े, 10 हजार भंडार और सवा लाख को मिल रहा रोजगार

ग्वालियर, चांचोड़ और तरीचर में बड़ी मात्रा में तैयार हो रहे खादी गारमेंट्स

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देशभर में 375 संस्थाएं बना रहीं खादी के कपड़े, 10 हजार भंडार और सवा लाख को मिल रहा रोजगार

देशभर में 375 संस्थाएं बना रहीं खादी के कपड़े, 10 हजार भंडार और सवा लाख को मिल रहा रोजगार

ग्वालियर.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पसंद खादी की डिमांड देश में बढ़ रही है। देशभर में 375 संस्थाएं काम कर रही हैं, जो खादी के कपड़े तैयार करती हैं। लगभग 10 हजार भंडार हैं और सवा लाख लोग रोजगार कर रहे हैं। देश में कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनकी दूसरी और तीसरी पीढ़ी खादी बना रही है। हर राज्य में खादी को पसंद किया जा रहा है। ग्वालियर के आसपास तरीचर, चांचोड़ा में खादी के कपड़े बड़े स्तर पर तैयार होते हैं।

शहर में 3 संस्थाओं में 700 लोग कर रहे काम
ग्वालियर में खादी के लिए तीन संस्थाएं काम कर रही हैं। इनमें मध्य भारत खादी संघ, महात्मा गांधी सेवा आश्रम जौरा, गांधी ग्रामोद्योग प्रतिष्ठान शामिल हैं। इनमें लगभग 700 लोग काम कर रहे हैं। केवल मध्य भारत खादी संघ में 350 कर्मी काम कर रहे हैं। इनमें बुनकर, सूत कातने वाले, कपड़े तैयार करने वाले शामिल हैं।

खादी पर कोरोना का ग्रहण
खादी से जुड़े लोगों के अनुसार पिछले डेढ़ साल में खादी की बिक्री पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। इस दौरान सेल काफी कम हुई। कई परिवारों ने भी सूत कातने और कपड़े बनाने का काम बंद कर दिया। लेकिन पिछले दो माह में एक बार फिर से लोग जुड़े हैं। अब सेल में भी इजाफा हुआ है।

ठंडे प्रदेशों में खादी की अधिक डिमांड
देश के ठंडे प्रदेशों में खादी की अधिक डिमांड है। इनमें कुल्लू मनाली, शिमला, उत्तराखंड, वैष्णोदेवी आदि शामिल हैं। यहां गारमेंट के साथ ही रजाई के कवर भी पसंद किए जा रहे हैं। खादी की कई नई संस्थाएं भी यहां ओपन हुई हैं और भंडार भी काफी बढ़े हैं।

फैक्ट फाइल
देशभर में खादी की संस्थाएं- 375
भंडार- 10 हजार
खादी बनाने वाले लोग- सवा लाख
नोट: यह आकड़े खादी से जुड़े लोगों के अनुसार लगभग में दिए गए हैं।

वर्जन
कोरोना काल को यदि छोड़ दिया जाए तो खादी की डिमांड देशभर में बढ़ी है। इस में 375 संस्थाएं खादी के कपड़े बना रही हैं और 10 हजार से अधिक भंडार हैं। खादी अब डिजाइनर होने से यूथ भी अट्रैक्ट हो रहा है। ग्वालियर में तीन संस्थाएं काम कर रही हैं।
वासुदेव शर्मा, अध्यक्ष, मध्य भारत खादी संघ