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गौरीसरोवर पर है 500 साल पुराना कालेश्वर महादेव का स्थान

शहर के ऐतिहासिक गौरीसरोवर के उत्तरी तट परस्थित कालेश्वर शिवमंदिर लगभग 500 वर्षपुराना है। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग अतिशय चमत्कारी है।

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Gaurav Sen

Aug 18, 2016

gauri sarovar kaleshwar mahadev

gauri sarovar kaleshwar mahadev


ग्वालियर/भिण्ड। शहर के ऐतिहासिक गौरीसरोवर के उत्तरी तट परस्थित कालेश्वर शिवमंदिर लगभग 500 वर्षपुराना है। गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग अतिशय चमत्कारी है। इसीलिए यहां हमेशा भीड़ रहती है। महाशिवरात्रि पर्व पर तो यह शिवालय कांवडिय़ों और अन्य महिला पुरुषश्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केन्द्र बन जाता है।

यूं शहर के गौरी सरोवर के तटों पर लगभग एक सैकड़ा प्राचीन शिवालय व अन्य देवी देवताओं के मंदिर हैं, पर उत्तरी तट के दादा वाले घाट पर कालेश्वर एवं दक्षिणी तट वाले अर्धनारीश्वर शिवालय की यहां अधिक मान्यता है। बताते हैं कि इन शिवालयों का निर्माण तत्कालीन भदौरिया राजाओं ने 15-16वीं शताब्दी में कराया था। सारे शिवालय आगरा उप्र के बटेश्वर में बने शिवमंदिरों की निर्माण व स्थापत्य शैली के हैं। कालेश्वर मंदिर के गर्भगृह का द्वार उत्तरमुखी है।



मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से सरोवर तक आने के लिए लगभग दर्जन भर सीढिय़ों की श्रंृखला है, जो कभी सरोवर के जल में डूबी रहती थीं और श्रद्धालु यहां बैठकर सरोवर की मछलियों को चुगाते थे, पर अब ये सीढिय़ां, मंदिर के आगे सरोवर के भूभाग पर सड़क का निर्माण हो जाने से अनुपयोगी हो गई हैं। मान्यता है कि श्रावण मास में कालेश्वर मंदिर के शिवलिंग पर नियमित विल्वपत्र अर्पण व अभिषेक करने से भक्त की हर मनोकामना पूर्ण
होती है।

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