मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से सरोवर तक आने के लिए लगभग दर्जन भर सीढिय़ों की श्रंृखला है, जो कभी सरोवर के जल में डूबी रहती थीं और श्रद्धालु यहां बैठकर सरोवर की मछलियों को चुगाते थे, पर अब ये सीढिय़ां, मंदिर के आगे सरोवर के भूभाग पर सड़क का निर्माण हो जाने से अनुपयोगी हो गई हैं। मान्यता है कि श्रावण मास में कालेश्वर मंदिर के शिवलिंग पर नियमित विल्वपत्र अर्पण व अभिषेक करने से भक्त की हर मनोकामना पूर्ण