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गांव की साधारण लड़की ने माया नगरी में बनाई जगह आज फेमस एक्ट्रेस

टीवी पर आर्टिस्ट को देख करती थीं खुद के होने का अहसास, अब कई सीरियल और वेब सीरीज में रतलाम के गांव की लड़की निभा रहीं किरदार।

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Actress Sapna Sikarwar

ग्वालियर. मन में चाह ओर दिल में कुछ कर गुजरने का जज्जा हो तो सपने सच करने के लिएं रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते है। ऐसा ही कुछ हुआ रतलाम के एक छोटे से गांव से निकली एक्ट्रेस सपना सिकरवार के साथ।एक्ट्रेस सपना ने सिर्फ मेहनत को ही अपना भगवान माना और वहां पहुंच गई जहां के उन्होंने सपने देखे थे। टीवी पर एक्ट्रेस को देख खुद के वहां होने का एहसास करती थीं। संघर्ष और मेहनत के बल पर उन्होंने अपने सपने को पा लिया।

इन दिनों सपना एंड टीवी पर प्रसारित कॉमेडी शो 'हप्पू की उलटन पलटन' में बिमलेश का किरदार निभा रही हैं। उन्होंने फीचर फिल्म 'चम्बल' साइन की है और उनकी दो बेन सिरीज भी आने वाली हैं। सपना की फैमिली मेंबर ग्वालियर में हैं और वह यहां परफॉर्म भी कर चुकी हैं।

पहला शो किया था 'साईं बाबा
सपना ने बताया कि मैं जहां से विलॉग करती हूं, वहां मेरे पास कोई चॉइस नहीं थी, केवल सपने धे। ऐसा लगता था सपने केवल सपने ही रहेंगे। डांस, सिंगिंग, एक्टिंग में सबसे आगे थी मैँ। स्कूलिंग के बाद मैंने बड़ोदा में एकेडमी जॉडन की। मेरी एक्टिंग स्किल अच्छी थी। मुझे पहला शो 'साईं याबा' मिला। इसके बाद 'पृथ्वीराज चौहान' और फिर 'जय वीर हनुमान! किया। टीवी में आने के याद मेरी एक्टिंग से प्रभावित होकर मुंबई से ऑडिशन के लिए कॉल आया। में गई, ऑडिशन दिए और कॉमेडी शो के लिए सिलेक्ट हो गई। मुझे 'सांझ' नाम का एक शो भी मिला।

शो के दौरान ही खत्म हो गए थे सारे पैसे
सपना की एक्ट्रेस बनने तक की कहानी में सघर्ष भी वहुच है शुरूआत में उसकी फाइनेंशियल स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। सपना ने बताया कि एक बार की बात है शूट के दौरान मेरे सारे पैसे खत्म हो गए। मैंने डायरेक्टर सर से कहा कि आप मुझे शो से निकाल वो, क्योंकि मेरे सारे पैसे खत्म हो गए हैं। तय उन्होंने मुझे कैश विए और जब पहला चेक आया तब मेने उन्हें वापस किए। वह मेरी लाइफ का टर्निंग पॉइंट रहा।

संघर्ष का जज्बा रखने वाले होते हैं सफल
मैं आज युवाओं से यही कहना चाहती हूं कि सपने उन्हीं के सच होते हैं, जो संघर्ष करने का जज्या रखते हैँ। मेरा भी मुंबई मैं कोई रिलेटिव नहीं था और न ही कोई गॉड फादर था। वहां के रास्ते भी नहीं फ्ता थे, लेकिन मैंने खुद का अपना मुकाम बनाया। यहां तक पंहुचने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा।